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	<title>Rajesh Roshan Blog</title>
	<link>http://rajeshroshan.com</link>
	<description>Dream comes true…U’ll get everything…</description>
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		<title>कई बार बदल देती है यह.. जिंदगी भी</title>
		<description><![CDATA[
उस नमक को भी खरोंचा था
बड़ा मीठा सा स्वाद था
जो आज भी है तुम्हारे.. चेहरे पर
कितना खरचा था
और ना जाने कितना खरच होगा
तेरी याद में मेरे.. आंसू
सालती है
वह हंसी और खुशी
जब अब मिली.. जुदाई
कि अब हमने सीखा
मौसम बदलने का मतलब
कई बार बदल देती है यह.. जिंदगी भी
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		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/24/emotions/</link>
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		<title>जो वामपंथी हैं और जो नहीं हैं..</title>
		<description><![CDATA[पिछले दस दिनों में भारतीय राजनीति में जो हुआ उस से मुझे कोई भारी ताज्जुब नहीं हुआ। संसद की लाज किसी ने अगर बचाई तो वह थे अकेले सोमनाथ दा ने। सोमनाथ दा को मेरा नमन। हमारे अच्छे कहलाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जरूर बेदाग प्रधानमंत्री हैं। इसमें किसी को कोई शक-सुबहा नहीं होगा। इसके [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/24/politicaly-left/</link>
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		<title>सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक देश, भारत की राजनीति की एक पेंटिंग</title>
		<description><![CDATA[
]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/21/black-indian-politics/</link>
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		<title>एटमी डील सभी पार्टी चाहते हैं!!</title>
		<description><![CDATA[
मैं मजाक नहीं कर रहा हूं। सच कह रहा हूं। आप भी मानेंगे कि एटमी डील के पक्ष में सभी पार्टियां हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा, समर्थन वापस लेने वाली लेफ्ट और कांग्रेस तो है ही। लेकिन थोड़ा बदलाव चाहती पार्टियां। क्या..?
कांग्रेस : अभी हो जाए एटमी डील सबसे बेहतर।
भाजपा : एटमी डील कांग्रेस के [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/19/nuclear-deal/</link>
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		<title>समाज का डर</title>
		<description><![CDATA[भूत-प्रेत से बड़ा है यह डर। कोई काला जादू नहीं लेकिन डर है कि लोग फुसफुसाते हुए भी डरते हैं। यह समाज का डर है। इससे डरते सभी लोग है। इसका मंतर अभी कम लोग सीख पाए हैं। सो डरते रहते हैं। कुछ सीख रहे हैं, कुछ सीखेंगे। धीरे-धीरे..।
उसकी बेटी ने प्रेम विवाह कर लिया।
उसके [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/18/fear-of-society/</link>
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		<title>मेरी कविता और राजनीतिक चर्चा</title>
		<description><![CDATA[मेरा कम पसंदीदा विषय,
राजनीति
अजीब है स्थिति
लाल लाल हुए जा रहे हैं
भगवा को सही-गलत सूझ नहीं रहा
कांग्रेस मोहरों की गणित सीख रही
हर एक इंसान की किसी पार्टी का फालोअर होता है।
किसी को प्रधानमंत्री मेकर लालू पसंद है
किसी को भावी प्रधानमंत्री राहुल
किसी को एनाउंनस्ड प्रधानमंत्री आडवाणी
किसी को वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन
किसी को सुपर प्रधानमंत्री सोनिया
राजनीति में तथ्यपरक बातें [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/17/political-commentry/</link>
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		<title>जाने तू.. या जाने ना</title>
		<description><![CDATA[मेरे 29 साल के दोस्त ने फिल्म देखने के बाद कहा, फिल्म अच्छी है लेकिन हमारे उम्र की नहीं है। सोचा मैं भी देख आऊं। कल का दिन मेरा छुट्टी का दिन होता है। टिकट ली और हो आया जाने तू..या जाने ना।
वो क्या कहते हैं कालेज गोअर्स की फिल्म है। सब यंग यंग। लगेगा [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/17/jane-tuya-jane-na/</link>
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		<title>एहसासों के आदत बनने का डर</title>
		<description><![CDATA[अकेला बैठा कुछ सोच रहा था, तभी बालकनी में अखबार के गिरने से उसका ध्यान भटका। ..हर सुबह कुछ ऐसा ही होता था। दिल्ली उसके सोच का शहर नहीं है। बड़े-बड़े माल में घूमने वाले लोग और वहां की रखी गई करीने से चीजें.. उसे क्यों पता नहीं बड़ी बेतरतीब समझ आती है।
लोगों का आपस [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/15/fear/</link>
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		<title>घर की याद और कुछ बातें झारखंड की</title>
		<description><![CDATA[घर से लौट कर आया हूं। जेठ की दुपहरी की तरह हैं अभी घर की यादें। एक दम कड़क। ताजा-ताजा। घर से चलते वक्त का अंतिम खाना.. कौर ठीक से अंदर नहीं जाता। आज भी.. और तब भी होता था जब घर से पहली बार निकला था।
एक जुलाई की रात झारखंड एक्सप्रेस से जा रहा [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/07/11/jharkhand-and-travel/</link>
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		<title>सभी हिंदी ब्लागरों के लिए</title>
		<description><![CDATA[एक गूगल समूह है। चिट्ठाकार। कई हिंदी ब्लागर आज भी उसके सदस्य नहीं हैं। शायद इसकी जानकारी ही नहीं है। इसका हिस्सा बनिए। अपनी राय दीजिए। दूसरों को भी जानिए। इसका सदस्य बनने से पहले इसके इस समूह का चार्टर जरूर पढि़ये। इस समूह के नियम बहुत कड़े हैं। लेकिन चूंकि समूह अच्छा है इसलिए [...]]]></description>
		<link>http://rajeshroshan.com/2008/06/27/google-group-chithakar/</link>
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