भारत, पाकिस्तान, रुपया और अशांति

बात शुरू होती है दो खबर के आने बाद से। खबर है कि पाकिस्तान का नाम सबसे दस अशांत देशों में है। आप लोग कहेंगे इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई है। है ही या होगा तभी शामिल हुआ है।

साथ ही दूसरी खबर है कि भारत उन 12 देशों की सूची में शामिल हो गया है जिसकी अर्थव्यवस्था एक खरब डालर के पार हो गई है। आप कहेंगे यह तो होना ही था आखिर इंडिया शाईन जो कर रहा है। सेंसेक्स रोज छलांगें लगाता है। कमल जी क्यों सही कहा ना!!!

अब मैं दोनो खबरों को मिलाता हूं देखते हैं क्या बनता है। भारत अशांत देशों में बहुत पीछे नहीं है। 121 देशों की लिस्ट में भारत का नंबर है 109। इसका यह मतलब हुआ कि यहां रुपया तो बढ़ रहा है लेकिन शांति नहीं बढ़ रही है। इस लिस्ट को बनाने के लिए 24 पैमाने चुने गए थे, जिसमें कुछ मुख्य हैं, भ्रष्टाचार, हिंसा, नियोजित अपराध, सेना के ऊपर खर्च।

यह आंकड़े ग्लोबल पीस इंडेक्स ने जारी किए हैं। ग्लोबल पीस इंडेक्स के वेबसाइट पर जब मैंने देखा तो मदर टेरेसा के एक कथन ने मुझे बरबस यह पोस्ट लिखने को मजबूर कर दिया।

‘अगर हमारे बीच शांति नहीं है तो इसलिए कि हमलोग भूल गए हैं कि हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।’
- मदर टेरेसा

शायद भारत और पाकिस्तान के साथ भी यही हो रहा है।

बड़ी फास्ट है यह इंटरनेट की दुनिया

मेक्सिको सिटी का समय भारत के समय से 11:30 घंटे पीछे है। वहां सोमवार देर रात और भारत में मंगलवार सुबह-सुबह खबर आई की मिस जापान ने चोला बदलकर मिस यूनिवर्स का चोला पहन लिया।

इंटरनेट के सारे ‘नवाबों’ ने अपना कंप्यूटर ऑन किया और लग गए काम में। मिस यूनिवर्स की घोषणा होने के एक घंटे बाद ही इंटरनेट के पांचों टॉप टीएलडी रजिस्टर हो गए।

मेरे पसंदीदा पोर्टल विकिपीडिया पर भी किसी ने रियो मोरी के नाम से पेज बनाया हुआ था जिसे गूगल ने अब तक 4 पेज रैंक दे दिया है।

मेरे एक कंप्यूटर जानने वाले दोस्त के अनुसार गूगल कहीं विकिपीडिया को भी न खरीद ले।

नोट: डॉट काम, डॉट नेट, डॉट ओआरजी, डॉट इंफो, डॉट आईएन ये सभी इंटरनेट टरमोनोलॉजी में टीएलडी कहलाते हैं।

सभी में पांच, पाक पोर्टल पर छह की मौत

मुझे नहीं पता कि यह क्यों है लेकिन गुगल के न्यूज सर्विस पर जब मैंने हैदराबाद ब्लास्ट के बारे में देखा तो मुझे मिला कि ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा वालों को मालूम है कि भारत के दक्षिण राज्य आंध्र प्रदेश में एक विस्फोट हुआ जहां पांच की मौत हो गई लेकिन हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के एक समाचार पोर्टल को जानकारी है कि छह लोग मारे गए। ऐसा कैसे हो सकता है?? मुझे लगता है कि इनका कुछ नहीं हो सकता है।

blast screenshot

खबर बदल ना जाए इसके लिए मैं इस पेज को स्कीनशाट लगा रहा हूं।

भारत कि भावी राजनीति साथ ही सृजन शिल्पी के चिट्ठे का जवाब

भारत में पत्रकारो कि जवाब देही के बारे में मैं क्या कहूयहा कि टीवी पत्रकारिता ”C” पर चलती हैसेक्स, सिनेमा, क्राइम और क्रिकेटराजनीती तो ये मज़बूरी में दिखाते हैंरही बात एग्जिट पोल कि तो आप मुझे ये बता दे कि १००-२००  रुपये प्रति दिन में कोई लड़का चुनाव चेत्र में जाकर क्या काम करेगाये सैफोलोजिस्ट अपने बारे में बडे बडे दावे करते हैं । इसी से उनकी रोजी रोटी चलती है । indian media ke baare BBC ki yah report bhi dekhe

एक बात तो कहना भूल ही गया की इस पोस्ट को पढ़ते हुए सृजन शिल्पी जी का यह पोस्ट जरूर पढे

जी हां इस बार मायावती कि सोशल इंजीनियरिंग जरूर काम कर गई हैमैं तो इसका कायल हुये बात लेकिन महत्वपूर्ण है कि इसे वो बाना के रख पाती हैं या नहीमायावती अपनी बात बिना लाग लपेट के बहुजन समाज को कहती रहीचाहे वो खुद को देवी बनाने वाली बात हो या फिर खुद पर चादावे वालीनेपथ्य के पीछे बोलना और काम करना मायावती कि प्रकृति में नही है

बस अब इस तीसरे पैराग्राफ से मैं सृजन शिल्पी जी के लेख सहमत नही हू।  चाहे बात किताबो कि हो या असलियत कि सोनिया गाँधी कम से कम आज भारतीय राजनीति कि सबसे ताकतवर और शस्कत महिला हैमेरे महिला कहने का मतलब ये नही है कि कोई पुरुष सोनिया गाँधी से ताकतवर हैरही बात राष्ट्रपति के चुनाव कि तो मायावती के पास विकल्प है ही नहीभैरो सिंह शेखावत को माया का समर्थन मिलने से रहाबाक़ी किसी को भी माया के अकेले समर्थन से राष्ट्रपति चुना नही जा सकता हैबात एक दम पक्की है

जहा कॉंग्रेस का कोई जनाधार ही नही है वहा राहुल बाबा और प्रियंका क्या कर सकती हैं? सपा और भाजपा कि तो यहा लुटिया दूब गई फिर हम आप कैसे सोच सकते हैं कि ये यहा के तुरुप हैं!!!

आपकी अगली पंक्ति मुझे हसी दिला रही है :) :) आप बेशक कॉंग्रेस को पसंद करे या ना करे लेकिन एक बुद्धिजीवी होने के नाते आपको नेताओ के तरह बयाँ नही देने चाहिऐआपके पास कोई एक ठोस जवाब है जिससे आप ये बता पाये कि कॉंग्रेस अब सत्ता में क्यों नही लौटेगी?

क्या आप लोगो को ये पता है कि अगले लोकसभा चुनाव तक १९ राज्यों में विधान सभा के चुनाव होंगे? राजस्थान और मध्य प्रदेश दो बडे राज्यों के चुनाव भी इसी बीच होंगे। आरक्षण के बारे में मैं क्या कहू ?? आपके पोस्ट में जिन लोगो ने बधिया विश्लेषण लिखा है वही लोग इस पोस्ट में भी अच्छा लिख चुके हैंअब मैं कुछ नही कह सकताये रहा आपका पोस्ट और ये आरक्षण पर लिखा गया रवीश का पोस्टजरा गौर से देखियेगा

इसके बाद जो आपने लिखा है उसके बारे में तो यही कहा जा सकता है कि हिंदी पट्टी को एक घातक बिमारी लगी है…. जातिप्रथा कीगावो में कहा जाता है, अपनी बेटी और अपना वोट अपने ही जात वालो को देना चाहिऐ

और अंत में मेरा अपना मानना है की जैसे जैसे भारत में जागरूकता और साक्षरता बदेगी । देश में केवल विकास  की राजनीती चलेगीइसके बावजूद हिंदी पट्टी के बारे में मुझे थोड़ी बहुत शंका जरूर हैसाथ में मैं यह कहना नही भूलूंगा कीकाश !!! भारत में विकास की राजनीति जल्दी शुरू हो

ऐसा रौंदा कि बस पूछो मत…

क्या ओपिनियन और क्या एक्जिट.. । सब फेल । जादू ऐसा चला कि पूछो मत.. ।

न्यूज चैनलों की टीआरपी बढ़ गई । न्यूज वेबसाइट्स में हिट होने लगे । हर कोई सुबह से ही जानने को बेकरार था कि आखिर कौन बाजी मारेगा ? चैनलों पर सभी दिग्गज प्रस्तोता मशरुफ थे कि बसपा, सपा और भाजपा में किसका दांव निकल आएगा ।

एक बड़े चैनल के बड़े रिपोर्टर ने कहा कि मायावती के लखनऊ निवास पर जो उनका नेमप्लेट लगा हुआ है, उस पर मायावती ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के बीच में जगह थोड़ा ज्यादा है । यही नहीं पूर्व अब साफ-साफ दिखाई भी नहीं दे रहा है । यह थी सुबह-सुबह की तस्वीर, जो शाम तक साफ हो गई ।

16 सालों बाद उत्तर प्रदेश में किसी को बहुमत मिल रहा है । यह मायावती की बहुत बड़ी जीत है । साथ ही उत्तर प्रदेश की जनता का भी ।

किसी जमाने में पहलवान रहे मुलायम सिंह ने राज्यपाल इस्तीफा सौंपा । उसके बाद मीडिया से मुखातिब होते मुलायम ने कहा कि सपा की हार का मुख्य कारण चुनाव आयोग की नीतियां रहीं । इसका क्या मतलब निकलता है, यह आप सोचे ? क्योंकि यह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इतिहास में पहला चुनाव है जब किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई । अब मुलायम क्या कहना चाहते हैं.. आप लोग समझ रहे होंगे । क्योंकि हम पब्लिक हैं और बाबू !!! ये पब्लिक है जो सब जानती है…

जरा याद करो कुर्बानी !!!

सुबह अखबार खोला ।  एक कागज (पंप्लेट) मिलानौएडा में एक कंप्यूटर संस्थान खुला हैकागज में ऊपर लिखा था फ्री  । और नीच लिखा था केवल सेवा चार्ज देय . संस्थान का नामलाल बहादुर शास्त्री कंप्यूटर संस्थान

राजनेतावो के नाम पर ऐसे ही कई संस्थान खुलते हैं और बंद भी हो जाते हैंमूर्तियों के बारे में नही कहूँगा क्योंकि आप बहता समझ सकते हैं कि शांति के दूत कबूतर …..क्या करते हैं !!!

न्द्त्व इंडिया और हिंदुस्तान को छोड़ दे तो किसी भी मीडिया ने संग्राम के १५०वि वर्षगाठ को ताव्व्जो नही दी

अब दूसरी बात । आज ही मेरठ से १८५७ के संग्राम के १५० साल पूरे होने पर होने एक मार्च का आयोजन किया गया । जिसमे देश भर के १०००० युवा भाग ले रहे हैं । ११ तारीख को यह मार्च देल्ही में आकर ख़त्म होगा । यहा राष्ट्रपति कलाम के साथ उप-राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और कॉंग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गाँधी युवाओ को संबोधित करेंगी

इस देश के साथ एक बड़ी विडम्बना हैमैंने कई लोगो से सुना है की यार !! जैसा देश भारत है ना वैसा और कोई देश नही हैना ही हो सकता हैयहा की संस्कृति, यहा ke विचार, यहा के लोग, यहा तक की हमारे देश का जो मानचित्र है वो भी सबसे बेहतर हैमैं भी कहा करता थालेकिन अब मुझे ये मानचित्र के बारे में कहना कुछ समझ नही आताखैर ये बाते तो बाद में ….

गंधिगिरी karte मुन्ना ने कहा था की इनको (नेताओ और क्रांतिकारियों) को कही रखना है तो अपने दिल में रखो . उनके नाम पर संस्थान बनाना , मूर्ति का अनावरण करनाये सब होना चाहिऐ ।  और अगर बने तो उनका उसी सम्मान से रख रखाव करना चाहिऐ ।  हमारे देश का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण रहा है ।  हमारे देश के क्रांतिकारियों और नेतावो ने पूरे विश्व को एक नै दिशा दीवो अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते हैं, रहेंगेहम देश वाशियो को भी उनकी तरह बहादुर और इमानदार होना चाहिऐक्योंकि जरा याद करो उनकी कुर्बानीमेरे और पूरे चिटठा जगत की ओर से सभी सहीदो को शत-शत नमन

BBC hindi ki report aur kuch rekhachitr

सर दर्द की गोली की बिक्री बढ़ गई

मेहंदी जयपुर से । मेहंदी को लपेटने के लिए कागज इलाहाबाद से । मेहंदी को लगाने वाला भोपाल से आया है । बारातियों को ले जाने वाली वोल्वो बस की एसी खराब हो गई । मेकअप उतर गया । अब अंबानी पहुंचे । और अब शेट्टी अपनी लंबी गाड़ी में आए हैं ।

पता नहीं क्या-क्या बताया । सर दर्द हो गया । क्या यह सब भी बताने की चीज है ।
प्राइम टाइम हो या अखबार का पहला पन्ना सब पर अमिताभ के बेटे और वधू की खबरें । यह शादी अभिषेक और ऐश्वर्य की है लेकिन मीडिया में इतना हाइप अमिताभ बच्चन की वहज से है ।

टीवी वालों की खबरों के दबाव में अखबार वालों की खबरें भी बदल गई । जमाना इंफोटेंमेंट का है । लेकिन ऐसी दशा-दिशा ।

आप किसी से पूछ लें सब इतने ज्यादा कवरेज से परेशान है । हर गली-नुक्कड़ में यही चर्चा है । मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी ।

वाह-वाह, क्या कार्टून है !!

Babubhai katara

ये ना तो बाबू हैं ना ही भाई । ये हैं बाबूभाई उर्फ कबूतरबाज । क्यों सही कहा ना ।

Image source: Hindustan 20, April 2007

‘मनी’ और ‘मणि’ ने एशियाड से दूर किया

सुरेश कलमाड़ी यही दोहरा रहे हैं । बकौल कलमाड़ी, मणिशंकर अय्यर जीते, दिल्ली हारी । दिल्ली को 2014 में होने वाले एशियाड खेलों की मेजबानी नहीं मिली । मैं इस बारे में बहुत कुछ नहीं जानता। इतना समझ पा रहा हूं कि दिल्ली के साथ खेल प्रेमियों व खिलाड़ियों की भी हार हुई है । लोगों के भी अलग-अलग विचार हैं । बीबीसी के फोरम पर लोगों के कुछ राय

इसी पर कुछ इंटरनेट समाचार संस्करण के लगाए गए शीर्षक । यहां देखे
खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर व भारतीय ओलंपिक संगठन के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी के बीच यह खींचतान भारत के लिए नुकसान दायक है । कलमाड़ी का कहना है कि हमारे सरकार खेल पर पैसा नहीं खर्च करना चाहती है ।

इससे पहले अय्यर कह चुके हैं कि खेल आयोजनों पर बड़ी रकम खर्च करने से पहले खेलों के आधारभूत ढांचे को विकसित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

खेल को लेकर हमारे लिए सबसे बड़ी बात है कि 2010 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी हम सही से करें । हम भारतवासियों की ओर एशियाड की मेजबानी जीतने वाले दक्षिण कोरिया के इंच्योन शहर को ढेरों बधाईयां ।

वजीर्निया हत्याकांड व अर्थशास्त्र

देश तरक्की कर रहा है। और करेगा। लेकिन इसके साथ ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। लोग पैसा और नाम के पीछे अंधी दौड़ लगा रहे हैं। दूसरा पहले से आगे निकलना चाहता है। पता नहीं कौन-कौन से तरीके लोग अपना रहे हैं। सोमवार को वजीर्निया में कोरियन मूल के एक लड़के ने पहले 33 लोगों की जान ले ली।

1999 के आंकड़ों के अनुसार कुल 21 करोड़ लोगों के पास अपनी बंदूक थी। आज अमेरिका की जनसंख्या तीस करोड़ पंद्रह लाख से कुछ ज्यादा है। अमेरिकी कानून के मुताबिक अगर आप वोट दे सकते हैं तो आप बंदूक भी खरीद सकते हैं।
मैंने इंटरनेट में हथियारों से हुई आय को ढूंढना चाहा लेकिन मिला नहीं। खैर यह कारोबार अमेरिका में अरबों में होगा।

बात करते हैं वजीर्निया हत्याकांड की तो मैं यह बता दूं कि जिस छात्र पर इसका आरोप लगा है उसके नाम के डोमेन को अमेरिका के ही किसी शख्स ने बुक करा लिया है। यह बात दीगर है कि उसका उपयोग वह वजीर्निया एकेडेमी के लिए ही कर रहा है।

यह है वजीर्निया हत्याकांड का अर्थशास्त्र