मैं आतंकवादी बनना चाहता हूं

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मैं दिन भर में औसतन 20 से 30 कीवर्ड सर्च करता हूं। अपने मतलब की। लेकिन एक खबर और एक कीवर्ड main terrorist banna chahta hon, जो मेरे ब्लाग पर मुझे दिखा उससे मैं चौंक गया। रोमन में सर्च किया गया यह कीवर्ड गूगल से मेरे ब्लाग पर उपयोगकर्ता को लाया है।

मुझे नहीं पता कि उपयोगकर्ता इसे क्यों सर्च कर रहा था। लेकिन मैं जब यह खबर बना रहा था तब मुझे पता चला कि लोग इंटरनेट पर ऐसा भी कहीं पब्लिक डोमेन में रखते हैं।

यह एक भयावह सच है। हमें इसे समझना होगा।

जब मैं इस मामले में अपने एक दोस्त से बात कर रहा था तो उनका कहना था, 12:52 kripal:

12:54 abey ek search ke liye itna bawal :)

  barbad hain tu bhi

12:55 me: tujhe lagata hai ki ye ek serach hai

  mujhe lagta hai ki bahut badi baat hai

यह मैंने उनके सहमति के बाद डाला है।

कहने का मतलब है कि इसके प्रति हम सभी लोगों को थोड़ा गंभीर व सजग होना होगा।

‘Shakira’ कीवर्ड पर एक दिन में 221 हिट

कल मैंने कोई पोस्ट नहीं लिखी थी। और आज सुबह देखता हूं कि अंग्रेजी कीवर्ड Shakira से मेरा सपना में 221 हिट हैं। मैं तो पहले समझ ही नहीं पाया कि ये क्या हुआ? शकीरा, 221, एक दिन में। कोई आइडिया नहीं। फिर पता चला कि icq.com पर इमेज सेक्सन में शकीरा सर्च करने पर मेरा सपना में डाली गई एक इमेज आती है। सारे लोग वहीं से आ रहे हैं। खैर आएं देखें।

पहले भारत गोल्बल हुआ, उस गोल्बल भारत में शकीरा आई और अब मेरा सपना गोल्बल हो रहा है। पोस्ट देखें।

नारद का एकाधिकार खत्म होगा!

अर्थशास्त्र का छात्र रहा हूं। मोनोपोली या एकाधिकार बाजार के लिए कभी अच्छा नहीं होता। यह सभी लोग जानते हैं। हां यह जरूर है कि नारद बाजार नहीं है क्योंकि इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पैसे की उगाही होती हो। लेकिन फिर भी नारद का काम करने का तरीका हमेशा विवादों में रहा है।

पिछले दो दिनों में मैंने दो एग्रीगेटर देखे हैं। मैंने नहीं जानता कि यह क्यों बनाया जा रहा है? वह भी तब जब नारद ‘बाजार’ नहीं है। साथ ही जो आने वाले एग्रीगेटर हैं वह भी बाजार की खूबियों से दूर रहेंगे। फिर इनकी जरूरत क्यों?

नारद में कुछ ना कुछ कमी रही होगी जिसे नारद के कर्ता धर्ता शायद नहीं समझ पा रहें हैं। पहले प्रतीक पांडे ने हिंदी ब्लाग्स बनाया और अब चिट्ठाजगत और ब्लागवाणी

बात सेक्स क्या को जोड़ने को लेकर हो या फिर राहुल का बाजार को हटाने को लेकर। सब काम कुछ दो-तीन लोग ही करते हैं। सदस्यों से तो ना कोई राय ली जाती है ना ही कोई मशविरा।

वैसे हिन्दी ब्लागिंग में नारद की भूमिका सराहनीय है। लेकिन समय के साथ होने वाले बदलावों के प्रति शायद नारद उतना गंभीर नहीं है और इसका कारण है यह आने वाले फीड एग्रीगेटर। कोई कहीं ना कहीं असंतुष्ट है इसी के कारण यह सारे एग्रीगेटर लाए जा रहे हैं।

खैर जो कुछ भी हो रहा है इससे मैं इतना ही समझ पा रहा हूं कि इंटरनेट पर हिंदी की वर्चस्वता बढ़ेगी।

यूट्यूब: वंदे मातरम और उसमे दिए गए कमेंट

[youtube=http://www.youtube.com/watch?v=s1UgUpKz3Lc]

रविवार का दिन, काम का दवाब कम होता है । यूट्यूब खोल विडो देखने लगाइस विडो को देख मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाता हैसोचा आज इसे अपने ब्लोग पर भी दाल दूजरा इस विडो पर दिए गए 96 कमेंट पर भी नजर डालिये

सावधान! कापीराइट, पेटेंट और आईपीआर से भूचाल आएगा

लोगों की बौखलाहट बढ़ेगी और यह तब तक बढ़ेगी जब तक इसे समझ नहीं लिया जाएगा। विदेशों में लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं या यू कहें हो चुके हैं। लेकिन हम भारतीयों की स्थिति इन मामलों में थोड़ी गंभीर है।

कापीराइट, ट्रेड मार्क, पेटेंट। अगर आपका काम रचानात्मक है, मसलन लिखना, पढ़ाना, पेंटिग, गाना गाना तो फिर आप को इनकी समझ जरूर होनी चाहिए। पता चला कल को आप चिल्ला रहे हैं कि यह मेरा है लेकिन कुछ कर नहीं पाएंगे। मतलब कि कोर्ट में केस हार जाएंगे।

आप लोगों ने सुना ही होगा बासमती चावल, करेला, हल्दी, योग के कई आसन अमेरिका में पेटेंट हो रहे हैं मतलब साफ है इन सब चीजों का कोई अब व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

गाने की कापीराइट के बारे में आप जानते हैं या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन अगर आप अपने जन्मदिन की पार्टी में घर पर ही 50 लोगों के सामने ‘आई एम ए डिस्को डांसर’ बजा रहे हैं तो एचएमवी वाले आप पर केस कर सकते हैं। यह गाना उन्होंने कापीराइट करा रखी है। कंपनी ने केवल कैसेट, सीडी, डीवीडी आपको अपने सुनने के लिए बेची है ना कि पूरे मोहल्ले को सुनाने को। सो सावधान! जानकारी बढ़ाइये

ज्यादा जानकारी के लिए वीकिपीडिया की यह लिंक देख लीजिए।

नारद, गूगल, विवाद, इस्तीफा और भी ना जाने कई..

जब भी आप बच्चे से पूछो कि आप क्या बनना चाहते हैं तो बेटा, पहले तो बोलेगा नहीं और अगर बोलेगा तो पुलिस, इंजीनियर, डाक्टर, पायलट से बाहर बोल ही नहीं पाएगा। यहीं तक उसकी समझ है।

मुझसे भी कई बार पूछा जाता था कि मैं क्या बनना चाहता था मैं तो बोल ही नहीं पाता था। अंजान लोगों को नहीं बता पाता था। मां पूछती थीं, तो बोलता था पुलिस।

अब पत्रकार हूं। पढ़ने-लिखने की आदत ने पत्रकार बना दिया नहीं तो हम भी शायद..।

अरे! मैं यह क्या लिख रहा हूं? मैंने शीर्षक तो कुछ और लगाया है इससे मिलता तो मैं कुछ लिख नहीं रहा फिर इस शीर्षक का मतलब! है मतलब, बताता हूं। कंप्यूटर जानकार इसे एसईओ कहते हैं, सर्च इंजन आपटिमाइजेशन।

यह जो मैंने शीर्षक में शब्द लगाए हैं यह नारद के पोपुलर हेडिंग कीवर्ड हैं। नारद, विवाद, गूगल, गूगल देव, प्रकरण, इस्तीफा व अन्य। केवल कल ही ना जाने कितने लोगों ने अपने शीर्षक में नारद शब्द का शीर्षक में प्रयोग किया था। आप कुछ भी लिखिए शीर्षक में इन शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए। मेरी गणना के अनुसार आपको कम से कम 20 क्लिक तो मिल ही जाएंगे।

एक ब्लोगर है नीरज राजपूत अच्छा लिखता है लेकिन उसे कोई नहीं पढ़ता। हां, कभी कभार राजीव रंजन जी पढ़ते हैं और टिप्पणी भी करते हैं।

तो भाइयों मैं कहना चाहता हूं कि आप बड़े नामों से ऊपर उठे नए चिट्ठेकारों की हौसला आफजाई करें। शीर्षक पर ना जाएं। कूड़ा भी मिल सकता है जैसे यहां मिला। बात समझ में आ गई ना।

वैसे एक बात और बता दूं। ‘नारद’ और ‘नारद विवाद’ दोनों कीवर्ड मुझे गूगल में टाप फाइव में जगह देता है। ना विश्वास हो तो सर्च कर लें।

भाईचारा बढ़ाइए: लिंक एक्सचेंज करिए

Peace not War 

इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ावा देना। इधर वैसे भी माहौल गर्म है तो मैंने सोचा कि क्यों ना कोई तरकीब सोची जाएं। तो ऐसा करते हैं मैं अपने ब्लागरोल में आप सभी टिप्पणी देने वाले लोगों के ब्लाग को अपने में जोड़ दूंगा। क्या पता शायद इसी से कुछ सुधर जाए।

वैसे यह बात जरूर है कि कई बार ब्लागरोल लिंक होते हुए भी विचार नहीं मिलते इसके लिए कोई आइडिया तो आप भी सोच सकते हैं। उद्देश्य है सभी के बीच शांति फैलाना। मेरा डोमेन आप जोड़े और मैं आपका।

‘शिवाजी’ ने ‘मेरा सपना’ को गूगल पर टाप पर पहुंचाया

मैंने 15 जून को एक पोस्ट लिखी ‘शिवाजी‘ फिल्म के ऊपर और आज क्या देखता हूं कि गूगल पर शिवाजी लिख कर सर्च करने पर ‘मेरा सपना’ सबसे ऊपर है।

मेरे लिए यह बड़ी बात है वो भी तब जब टाप 10 में विकिपीडिया और बीबीसी जैसे धुरंधर खड़े हों।

धन्यवाद गूगल

भाईचारा बढ़ाइए: लिंक एक्सचेंज करिए

Peace not War

इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ावा देना। इधर वैसे भी माहौल गर्म है तो मैंने सोचा कि क्यों ना कोई तरकीब सोची जाएं। तो ऐसा करते हैं मैं अपने ब्लागरोल में आप सभी टिप्पणी देने वाले लोगों के ब्लाग को अपने में जोड़ दूंगा। क्या पता शायद इसी से कुछ सुधर जाए।

वैसे यह बात जरूर है कि कई बार ब्लागरोल लिंक होते हुए भी विचार नहीं मिलते इसके लिए कोई आइडिया तो आप भी सोच सकते हैं। उद्देश्य है सभी के बीच शांति फैलाना। मेरा डोमेन आप जोड़े और मैं आपका।

साहित्य में होते रहने चाहिए वाद-विवाद-संवाद: नामवर

नई दिल्ली। सुमित्रानंदन पंत प्रकरण की पृष्ठभूमि में मूर्धन्य समालोचक नामवर सिंह ने कहा है कि हिंदी की छोटी सी दुनिया में वाद-विवाद-संवाद होते रहने चाहिए क्योंकि विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि वह ‘डिप्लोमेटिक’ बातें नहीं करते हैं और दूसरों के नजरिए के सम्मान के भाव के साथ साफ बात कहते रहे हैं और कहते रहेंगे।

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