ब्लाग शब्द को मैंने पहली बार 2004 में सुना था। टाइम्स आफ इंडिया के किसी लेख में। जिक्र था कि ब्लाग कीवर्ड को अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों ने सर्च किया था। उसके कुछ समय बाद हम भी ब्लाग वर्ल्ड में कूद पड़े, जैसे आज अमिताभ और लालू यादव पड़े हैं। वर्डप्रेस में ब्लाग बनाया, अपना डोमेन लिया.. कमेंट मिले. दिया।
मुझे यह हिंदी ब्लाग का पहला चरण लगा और यह पिछले तीन या कहूं चार सालों से निरंतर चला आ रहा है। हिंदी ब्लागरों की संख्या तिहाई से निकलकर चार अंकों तक पहुंच गया, ठीक वैसे ही जैसे महंगाई इकाई अंक से निकलकर दहाई अंक में पहुंच गया। यहां कुछ भी लिखो बधाई, साधुवाद, बढि़या, बेहतरीन जैसे ही पर्यायवाची शब्द कमेंट के रूप में आपको मिलेंगे। कुछेक अनामी भाई बंधु जन आपको कभी गरियाते मिल जाएंगे तो कभी आलोचना करते हुए।

मैं दूसरे चरण की बात करना चाहता हूं जब लोग आलोचना करें तो नाम लेकर। अपने नाम से रजिस्टर कर आलोचना करें। ब्लाग से मोडरेशन को करीब-करीब हटा दिया जाए। खास-खास विषयों से जुड़े ब्लाग बने, जो धीरे-धीरे दिख रहे हैं। नेताओं की तरह आरोप-प्रत्यारोप ना करें। ब्लाग को अपने लिए लिखें। एग्रीगेटर से जुड़े हमारे-आपके लिए नहीं।
इंटरनेट के लिए एक बात हमेशा याद रखें। कंटेंट इज किंग। आप अच्छा लिखेंगे। कल, परसों, महीने क्या सालों बाद आपकों पढ़ेंगे। आप अच्छा नहीं लिखेंगे तो आप किसी को लिंक भेज दीजिए, बधाई, बेहतरीन का एक कमेंट देकर चलता निकलेगा। आप खुद सोचिए, क्या आपके लिखे लेख का दस साल बाद कोई मतलब रहेगा? या फिर ऐसे लेख जिसे कोई अंजान पढ़ेगा, उसे समझ पाएगा। हिंदी ब्लाग में चलने वाली लड़ाइयों को वही समझ पाएंगे, जो इन पर नजर रखे हुए हैं। एक हफ्ते बाद इनकी सार्थकता नगण्य हो जाएगी। फिर अपनी रोशनाई बरबाद करने को क्या फायदा!
हिंदी ब्लाग को भी बदलाव की जरूरत है। इस दूसरे चरण का आगाज हम आपको ही करना होगा।