इतिहास गवाह है कि भारत को नजरअंदाज कर कभी भी कोई काम नहीं किया जा सकता। धीमे-धीमे ही सही लेकिन भारत और भारतीय अपनी पहचान विश्व के अन्य भूभाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे रहें हैं।
हलिया में पत्रिका फोब्र्स ने कहा कि 2018 तक भारत में सबसे ज्यादा अरबपति होंगे। आम भारतीय इन्हीं बातों से खुश हो लेता है। लेकिन विदेशियों को यह बातें नागवार लगती होंगी! मैं यहां “होंगी” लिख रहा हूं क्योंकि ऐसा मेरा अंदाजा है। कोई ठोस प्रमाण नहीं है मेरे पास।
इस अंदाजे को और बलवती करती है कोंडलीजा राइस का यह बयान कि विश्व में खाद्यान्न समस्या जो उत्पन्न हुआ है, उसका एक मुख्य वजह भारत है। भारत में इन दिनों खाद्यान्न की खपत बढ़ गई है जिसके कारण विश्व के कई हिस्सों में इसकी कमी हो गई है।
विश्व का सबसे अधिक उर्जा खपत करने वाला देश जब विश्व का सबसे अधिक खाद्यान्न उपजाने वाले देश को ऐसा कुछ बोले तो कुछ समझ नहीं आता।
जिस तेल के लिए अमेरिका ने इराक पर हमला किया था, लाखों डालर खर्च कर दिए अब वही तेल अमेरिका के साथ पूरे विश्व को अपनी धार दिखा रहा है। बांग्लादेश, हैती, जिम्बाब्वे, फिलीपींस व मध्य पूर्व अफ्रीका के देशों में खाने की भारी कमी है। राईस इसी का ठीकरा विश्व के दो सबसे विकास करने वाले देशों (भारत और चीन) पर फोड़ देना चाहती हैं।
अर्जेटीना में हाल ही एक किलो टमाटर की कीमत एक किलो गोश्त से ज्यादा हो गई थी। भारत में तो सब्जियों के दाम किलो में बताए ही नहीं जाते। यहां दुकानदार सब्जियों के दाम 250 ग्राम के हिसाब से बताता है।
हर देश की खाद्यान्न जरूरत बढ़ रही है। इसे दूसरे देश के भरोसे रह कर पूरा नहीं किया जा सकता। भारत में तेल नहीं है तो जापान में खाद्यान्न नहीं तो दुबई में पानी नहीं। इन सब की वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्मेदारी वहां की सरकार को करनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र ने खदान संकट से निपटने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है.
कुछ संबंधित लिंक्स
Washington Post : Food Crisis
Sunday Herald : Articles on Food Crisis
Time Magazine: After The Oil Crisis, a Food Crisis?

