अंजाम के बारे में सोचिए!! कुछ लोग कहेंगे क्या यह आगाज है!! जी हां, यही आगाज है। ऐसे मुद्दे का आगाज ऐसा ही होता है। और अंजाम भी धीरे धीरे ही पता चलता है। बयान आएंगे, काम नहीं होगा।
मेरा घर झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र में है। लोग सर्दियों में कोयला जलाकर छोड़ देते हैं। लाखों टन कोयला यूं ही जल जाता है। वहां के लोगों को इसकी आदत हो गई है। इसका मतलब यह नहीं है आने वाले खतरे से वह बच जाएंगे।
कच्चा तेल 135 डालर प्रति बैरल तक जा पहुंचा है।
ऐसी खबरों का तात्कालिक प्रभाव कुछ ही समझ पाएंगे। यह एक देश के एक पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाएगी, इसकी चपेट में घाना से लेकर दक्षिण अफ्रीका और क्यूबा से लेकर अमेरिका तक को होगा। भारत और चीन की स्थिति तो और नाजुक होगी। जीडीपी का सारा गणित भूल जाएंगे यह देश।
अमेरिका अपने तेल के कुंओं को अभी बचा कर रखना चाहती है। ओपेक उत्पादन बढ़ाना नहीं चाहता। नाइजीरिया में आपसी लड़ाई चल रही है। बाजार में स्लो डाउन का अंदेशा लगाया जा रहा है।
लोग सीएफएल की बात कर रहा है। ऊर्जा बचाओ का नारा लगा रहे है। बहुधा को यह बात समझ नहीं आ रही है। यह आप पर नहीं तो आपके बच्चों पर तो असर डालेगी ही, और बच्चे नहीं तो उनके बच्चे।
अगर आप समझ गए तो उर्जा को बचाइये, यह खत्म हो रहा है।

