क्या सही पहचान है बाल ठाकरे की: एक कार्टून

Bal Thackrey and BJP

बाल ठाकरे किसी ज़माने में कार्टूनिस्ट थे आज उन पर यह कार्टून कितना सही बैठता हैसोलह आने सच, ये भाजपा की नियति है की उसका यह हाल हो रहा है 

यूट्यूब: वंदे मातरम और उसमे दिए गए कमेंट

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रविवार का दिन, काम का दवाब कम होता है । यूट्यूब खोल विडो देखने लगाइस विडो को देख मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाता हैसोचा आज इसे अपने ब्लोग पर भी दाल दूजरा इस विडो पर दिए गए 96 कमेंट पर भी नजर डालिये

सुनीता को मिलेगा ‘भारत रत्न’!

सुनीता के धरती पर उतरते ही जो पहला अवार्ड उन्हें मिला वह है ‘पर्सन आफ द वीक’। एबीसी न्यूज चैनल ने सुनीता को यह अवार्ड देते हुए कहा कि जो महान कार्य सुनीता व उसके साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने की है उसके लिए बधाई।

अब बारी है भारत सरकार की। पिछला भारत रत्न मिला था शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खां। सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में हुआ है लेकिन सुनीता को भारत से काफी लगाव है। जब वह छह महीने पहले अंतरिक्ष में जा रही थी उस समय अपने साथ गणोश की एक मूर्ति और समोसे ले गई थीं।

सुनीता के काम ने उनका कद इतना बड़ा तो कर ही दिया है कि भारत सरकार को यह घोषणा करते हुए फक्र महसूस करना चाहिए। सुनीता अमेरिका और भारत से ऊपर उठकर सारे विश्व की है।

इससे पहले भी ऐसा हो चुका है जब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था तो उन्हें भारत के कोई भी नागरिक सम्मान नहीं मिला था। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था।

सुनीता विलियम्स को लेकर मेरा भी एक अनुभव है, जो मैं यहां बताना चाहूंगा। मैं अपने खाली समय में विकिपीडिया अंग्रेजी के लिए संपादन करता रहता हूं। तो हुआ यूं कि विकिपीडिया की नीति के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति का लेख बनाया जाता है तो उसके नाम उन विभिन्न भाषाओं में लिखे जाते हैं जिससे संबंधित व्यक्ति जुड़ा हुआ है। मसलन शिल्पा शेट्टी के लेख में उनका नाम हिन्दी के अलावा मराठी से भी लिखा जाएगा क्योंकि वह वहां की हैं।

ठीक उसी प्रकार से सुनीता विलियम्स के लेख में मैंने उनका नाम हिंदी से लिख दिया। दूसरे दिन किसी ने उनका हिंदी का नाम हटा दिया। मैंने उस बंदे के पेज पर जाकर पूछा कि आपने क्यों हटा दिया क्योंकि मैंने हिंदी में इसलिए लिखा था चूंकि वह भारतीय मूल की हिंदी है और भारत की राजभाष हिंदी है। कुछ बहस-मुबाहिसों के बाद मेरी जीत हुई और उनका नाम मैंने हिंदी में रहने दिया।

ठीक इसी तरीके की जीत तभी होगी जब हम सब मिलकर कहेंगे कि सुनीता विलियम्स को भारत रत्न मिलना चाहिए।

मैं तुझे मीर कहूं, तू मुझे गालिब

इस जुमले के बारे में आप लोगों को तो खूब पता होगा। यह एक तरीके की मार्केटिंग है। ‘मैं तुझे मीर कहूं, तू मुझे गालिब’।

रजनीकांत ने शिवाजी फिल्म के रीलीज के बाद उठे एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के ‘शहंशाह’ है। उन्होंने कहा था, Yes i am the King but he is Emperor.

अब बारी थी अमिताभ बच्चन की, उन्होंने रजनीकांत के इस बयान पर एक पत्रकार को कहा कि रजनीकांत ही असल ‘शहंशाह’ हैं। अमिताभ के बोल थे, ‘Rajni is phenomenal. The largest, the best and truly the boss! It is ridiculous to compare me with him।

अब यह बहस तो बड़ी देर तक चलती रहेगी कि दोनों में से सचमुच बड़ा कलाकार कौन है। रजनीकांत, जो एक टैक्सी ड्राइवर से यहां तक पहुंचे या अमिताभ जिनकी बीमारी पर मंदिरों के बाहर भीड़ लंबी हो जाती है।

वैसे दोनों अपनी-अपनी जगह महान हैं।

साहित्य में होते रहने चाहिए वाद-विवाद-संवाद: नामवर

नई दिल्ली। सुमित्रानंदन पंत प्रकरण की पृष्ठभूमि में मूर्धन्य समालोचक नामवर सिंह ने कहा है कि हिंदी की छोटी सी दुनिया में वाद-विवाद-संवाद होते रहने चाहिए क्योंकि विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि वह ‘डिप्लोमेटिक’ बातें नहीं करते हैं और दूसरों के नजरिए के सम्मान के भाव के साथ साफ बात कहते रहे हैं और कहते रहेंगे।

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रियल एक्शन हीरो रजनीकांत की ‘शिवाजी’ रीलीज

मैं ऐसा मान नहीं सकता कि आप लोग रजनीकांत को ना जानते हों। वह देश के सबसे बड़े एक्शन हीरो हैं। उनके कई एक्शन की कापी देश के अन्य फिल्मों में ही नहीं विदेशी फिल्मों में भी बराबर होती है।

रजनीकांत सिगरेट भी पीते हैं तो रिवाल्वर से। उनके फाइटिंग सीन तो लाजवाब है। आप यूट्यूब के इस विडियो को देख लें।

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‘शिवाजी’ भारत की सबसे महंगी फिल्म है और रजनीकांत सबसे महंगे हीरो। इस फिल्म के लिए रजनीकांत ने 19 करोड़ रुपये लिए हैं। फिल्म के निर्देशक हैं शंकर जिन्हें दक्षिण भारत का स्टीवन स्पीलबर्ग भी कहा जाता है। संगीत एआर रहमान का। इस फिल्म ने रीलीज होने से पहले ही कितने रिकार्ड बना दिए हैं। रिकार्ड की ज्यादा जानकारी बीसीसी के इस रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।

अफसोस मुझे केवल एक बात का है कि मुझे ना तो तमिल आती है ना ही तेलगू। काश!! मैं भी तमिल या तेलगू समझ पाता।

मुझे एक और विडियो मिल गई इसके एक्शन पचा पाना मुश्किल है लेकिन यह रजनीकांत है, जिसके लिए सबकुछ संभव है। इसे भी देख लीजिए।

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Rajinikant Page over Wikipedia

आपका ध्यान किधर, “किसान” पर एक कार्टून इधर

 

भाई ना तो ये गाव के हैं और ना ही शहर केये लोग हैं अभिनेताकोई भी रुप धर सकते हैंबहरुपिया

..तो फाइनली आज ‘तुलसी’ टें बोल जाएगी

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इस किरदार ने भारतीय घरों में बहुत कुछ बदला है। लोगों के रात के खाने का समय बदल दिया था इस सीरियल ने या यूं कहें इस किरदार ने। पत्नी पति से कहती है एक बार सीरियल खत्म हो जाये फिर खाना बाना देती हू

भारतीय टेलीविजन इतिहास की पहली फैशनेबल बहु ‘तुलसी’ का आज अंतिम दिन होगा। अगर मैं गलत नहीं हूं तो इससे पहले ‘स्वाभिमान’ ही एक ऐसा सीरियल था जिसमें ग्लैमर दिखता था और उसमें अंजू महेंद्रु का किरदार ग्लैमरस किरदार में दिखती थी।

खैर, ‘क्योंकि सास भी कभी बहु थी’ की सबसे पुरानी किरदार तुलसी विरानी। आज के प्रोग्राम में एक दुर्घटना में तुलसी की मौत हो जाती है।
कई शादी-शुदा पुरुष तुलसी को सबसे बड़ी विलेन मानते हैं। आखिर उसने ड्राइंग रूम से निकलकर उसके बेडरूम तक की दुनिया को बदला है। आज हर घर में ड्राइंग रूम में और बेड रूम में टीवी जो होता है।

एकता कपूर का इसके बाद घर-घर में नाम हो गया है। वो अलग की बात है कि ऑरकूट में I hate Ekta Kapoor नाम से भी एक कम्यूनिटी बनाई गई है। लेकिन वो एक गाना है ना.. ‘जब से मैं थोड़ा सा बदनाम हो गया, यार मेरा बड़ा नाम हो गया’।

वैसे मेरा अपना मानना है कि जिस तराजू पर टीवी धारावाहिकों को तौला जाता है, यह सब उसी का खेल है। टीआरपी ही तुलसी को मरवा रहा है और मुझे कोई ताज्जुब नहीं होगा जब यही टीआरपी तुलसी को जिंदा भी कर दे।

हां!!! जिस किसी को भी इसके बारे में पता चल रहा है सब अपने-अपने एक्सपर्ट कमेंट दे रहे हैं आपका क्या कमेंट है?

माफ किजिएगा अगर किसी को यह शीर्षक बुरी लगी तो। मैं उनसे निजी रूप से माफी मांगने को तैयार हूं। अपना फोन न यो मेल आई डी बता दें।

एक पंक्ति का पोस्ट लेकिन फिर भी मस्त

Amar singh fraud

क्या लाजवाब शीर्षक लगाया है।  मैं तो यही कह सकता हु कि अमर सिंह को बडे नजदीक से जनता होगामैंने देखते के साथ कहा था क्या मस्त हेडिंग हैआप क्या कहेंगे ??

अमिताभ बच्चन: ‘शहंशाह’ से बने ‘मिस्टर नटवरलाल’

मैंने अमिताभ बच्चन की मि. नटवरलाल देखी थी इसलिए कि उसमें राजेश रोशन का संगीत था। यही कोई 6-7 था मैं। वो एक भावनात्मक लगाव था कि मेरे ही नाम का कोई संगीतकार है।

फिर बड़ा हुआ तो अमिताभ मेरे सबसे पसंदीदा हीरो बन गए। मैंने ‘शहंशाह’ देखी। अमिताभ इसमें अपना भेष बदलकर दुश्मनों को मारते हैं। अच्छी फिल्म थी। आज भी टीवी पर आता है तो देख लेता हूं।

लेकिन अब बालीवुड के ‘शहंशाह’ वास्तविक जीवन में ‘मि. नटवरलाल’ बन गए हैं। कानून की पेचीदगियां तो मैं नहीं जानता लेकिन कोई भी यह कैसे साबित कर देगा कि ‘स्टार आफ द मिलेनियम, अमिताभ बच्चन’ किसान है।

और अगर यह साबित हो जाता है कि वह किसान हैं तो सोचिए उस सिख परिवार का जो 1970 से उस जमीन का मालिक है। उसका क्या होगा।

वैसे मेरी अपनी समझ कहती है कि अमेरिका की तरह हमारे यहां भी कानून थोड़े कड़े होने चाहिए। जब पेरिस हिल्टन को शराब पीकर गाड़ी चलाने के जुर्म में सजा हो सकती है तो क्या अमिताभ को घपलेबाजी करने के जुर्म में 6 महीने की सजा तो हो ही सकती है।

किसी ने ठीक ही कहा है संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात॥