कहीं महंगाई आपके इन्वेस्टमेंट को खा तो नहीं रही?

मैं जब केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ता था तो स्कूल फी महज 5 रूपए महीने लिए जाते थे. जिसे एक साथ तीन-तीन महीने में देना होता था. बाद के दिनों में ये बढ़कर 15 रुपये महीने हो गया.

केंद्रीय विद्यालय की वेबसाइट से पता चला कि अब ये बढ़कर कुछ 400 रुपये महीने हो गया है.

इस स्कूल के फी बढ़ने को ही महंगाई कहते हैं. फी की ही तरह खाना-पीना भी महंगा होता रहता है. दवाई से लेकर पान तक साल दर साल महंगा होता जाता है. पिछले 30 साल के महंगाई के आंकड़ों को देखे तो ये ऊपर नीचे होता रहता है लेकिन औसतन ये 6-6.5 फीसदी की दर से बढ़ रहा होता है.

आप सब लोग भी उन चीजों के बारे में पता लगाइए जिसे आप 15-20 साल पहले यूज़ करते थे. उसकी तब क्या कीमत थी और आज क्या iqoption डेमो कीमत है. आप खुद अंदाजा लगा पाएंगे कि महंगाई कैसे दीमक बन जाता है.

अब आप इन सब चीजों को पाने के लिए कुछ पैसे बचाते हैं या यूं कह लीजिये इन्वेस्ट करते हैं. अगर इस इन्वेस्टमेंट से आपको 6 प्रतिशत से ज्यादा के दर से पैसा मिल रहा है तब तो ठीक है. वरना…वरना ये कि आपने पैसे जमा किये…10 या 20 साल बाद जब वो पैसा मिला तो उस पैसे की वही वैल्यू है जो 10-20 साल पहले आपने जमा किया था. तो इसे ही कहते हैं कि आपके पैसे को महंगाई खा गई.

एक नजर उन प्रोडक्ट पर जो औसतन कितने का रिटर्न देते हैं.

 

प्रोडक्ट कितना इंटरेस्ट टैक्स लगेगा या नहीं
सेविंग अकाउंट 4-6 % टैक्स लगेगा
एनएससी 5 साल 8.5 % टैक्स लगेगा
एनएससी 10 साल 8.80 % टैक्स लगेगा
बैंक एफडी 8.5 % टैक्स लगेगा
पीपीएफ 8.7 % टैक्स नहीं लगेगा
किसान विकास पत्र 8.7 % टैक्स लगेगा
LIC (जीवन आनंद) 6-7 % टैक्स नहीं लगेगा
यूलीप प्लान 9 % टैक्स नहीं लगेगा
म्यूच्यूअल फंड 12-18 % टैक्स नहीं लगेगा

 

अब इसके आधार पर आप अपना इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट चुन सकते हैं. ऐसे प्रोडक्ट को चुनिए जो महंगाई से लड़ने की ताकत रखता है. वरना…वरना आपका पैसा अपनी ताकत खो देगा.

 

प्रीमियम वापस मिलने वाला टर्म insurance…. ना बाबा ना!!

किसी दोस्त के भाई को टर्म insurance चाहिए. उसका भाई डॉक्टर है. उसे टर्म insurance चाहिए था लेकिन प्रीमियम वापस मिलने वाला. उसका मानना था कि मेहनत से की गई कमाई बेकार नहीं जानी चाहिए.

अगर वह टर्म insurance को लेकर जागरूक हो सकता है तो इसके बाद की जिम्मेदारी मेरी. तुषार ये पोस्ट तुम्हारे लिए.

आखिर प्रीमियम वापस मिलने वाला टर्म insurance क्यों नहीं लेना चाहिए.

अगर आप 30 साल के नॉन स्मोकर हैं और 50 लाख का बेसिक टर्म insurance लेते हैं तो प्रीमियम 10 हजार से 17 हजार रुपये के बीच आएगा. लेकिन आप प्रीमियम वापस पाने वाला ऑप्शन चुनते हैं तो प्रीमियम बनेगा करीब 30 से 40 हजार के बीच.

अब इसी को जरा टेबल के रूप में समझते हैं.

उम्र टर्म बेसिक टर्म insurance रिटर्न ऑफ़ प्रीमियम
कवर 25 साल 25 साल 10 लाख 10 लाख
प्रीमियम 2800 9 हजार
अंतर 6200
मैच्योरिटी कुछ नहीं 226000

 

इन्वेस्ट अमाउंट टर्म रिटर्न @ 8 % रिटर्न @ 10 % रिटर्न @ 12 % SIP(Rs.517)
6200 25 साल 492000 612000 8,71,768

 

इस टेबल से यही समझ आ रहा है कि 6200 हर साल बचाकर अगर आप उसे कहीं अच्छे जगह में निवेश करते हैं तो वो आपको ज्यादा रिटर्न दे सकता है. लेकिन इसी बचे पैसे को एसआईपी के जरिये हर महीने 517 रुपये लगाते हैं तो वो बढ़कर 8,71,768 हो जायेंगे.

कहने का यह मतलब है कि प्रीमियम रिटर्न के चक्कर में पैसे ज्यादा भी देते हैं और जितना मिलना चाहिए उससे पैसे भी कम मिलते हैं.

आप अपने बच्चे को फोलियो नंबर गिफ्ट कीजिए!!

ये सुनने में अटपटा है लेकिन है बहुत ही मारक. आप आजमाइए. आप खुश हो जायेंगे. जिस दिन आपके घर में एक नया सदस्य आता/आती है, उसी महीने से आप उसके नाम से एक इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड लीजिये. और महज उसमें 500 रुपये हर महीने डालिए. और तब तक डालिए जब तक आप दादा/दादी ना बन जाए. दादा/दादी बनने की ख़ुशी में उसे उस फोलियो को गिफ्ट कर दें.

अगर हम यह मान कर चले की आपके घर में नया सदस्य आपके 30वें साल में आया है और उसके 30 साल बाद आप दादा/दादी बनते हैं. इस 30 में आपने महज 500-500 रुपये कर 30 साल में 180000 रुपये जमा किये. जिस पर 18 फीसदी के हिसाब का कंपाउंड इंटरेस्ट जोड़ें तो आप अपने पोते-पोती को 72 लाख रुपये से ज्यादा की रकम सौपेंगे.

ये गिफ्ट का तरीका बहुत ही यूनिक है. आप इससे ना केवल अपने बच्चों बल्कि उसके भी बच्चों को एक भारी मदद देंगे. इसे आजमाइए.

आप खर्च को निपटाते हैं या खर्च आपको?

जरूरतें लोगों की ख़त्म नहीं होती लेकिन पैसा ख़त्म हो जाता है. जरूरत और चाहत के बीच जिंदगी में बड़ी कसमकस है. आम जीवन में खर्च हमेशा कमाई से ज्यादा होता है. क्या आप अपने खर्च को समझते हैं, उसे मैनेज करना जानते हैं? अगर हां, तो वाकई ये अच्छी बात है और अगर नहीं तो इसे मैनेज करना सीखिए.

कुछ उपाय…

सबसे पहले आप ये जानने की कोशिश कीजिए कि आपकी कमाई का सबसे बड़ा खर्च किस चीज पर हो रहा है.

बच्चों की पढाई को छोड़ कर सभी चीजों के खर्च को आप मैनेज कर सकते हैं, या करना चाहिए. मसलन… कपड़ों पर खर्च, घूमने पर खर्च, दवाइयों पर खर्च, महंगे गैजेट खरीदने का शौक…. ये कुछ ऐसे खर्च हैं जो आप अपनी कमाई से हर महीने-दो महीने में इन पर खर्च करते हैं.

कुछ खर्च ऐसे हैं जो जीवन में एक बार होते हैं लेकिन जीवन की सारी कमाई आपका ले लेती हैं. शादी में होने वाला खर्च, बीमारी पर ऑपरेशन का खर्च, घर खरीदने-बनाने का खर्च…ये तीन जीवन के सबसे बड़े खर्च हैं, जिसे मैनेज करना ही चाहिए.

शादी में खर्च कम कीजिए, दिखावा करना कोई अच्छी चीज नहीं है. बीमारी/ऑपरेशन के लिए हेल्थ insurance एक बेहद जरूरी चीज है. ये हर किसी के पास होना ही चाहिए. घर रहने के लिए लीजिये वो भी सस्ते लोन के साथ. जहां जितना डिस्काउंट मिलता है लेना चाहिए. ये बहुत बड़ा खर्च है.

बाकी हर महीने होने वाले खर्च के लिए सामान थोक भाव में लीजिये. हर महीने अगर घर के राशन में 500 बचाएंगे तो साल का 6000 होगा जिससे आपके बच्चे के लिए आराम से एक प्रिंटर खरीद सकते हैं. चीजों को ऐसे सोचना शुरू कीजिए. जो जरूरत का ना लगे उसे नहीं लेना चाहिए. जिन दुकानों में दवाएं सस्ती मिलती हैं, दवा वहीं से लेना चाहिए.

ऐसे ही कुछ उपायों से आप अपने खर्चों को मैनेज कर सकते हैं.

 

मिस सेलिंग से परेशान!!!

नौकरी छोड़ कर अपना काम करते हुए 6 महीने होने को चले. इस काम में बहुत संभावना है. लोग पर्सनल फाइनेंस से अनजान किसान विकास पत्र और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट लेने में बिजी हैं. अब उनके लिए क्या कहा जाए… या तो अब तक उन्हें इनके टैक्सेशन के बारे में सही से मालूम नहीं है या फिर किसी ने उन्हें बरगलाया है.

इस सेक्टर में काम करने वाले लोगों ने इसे मिस सेलिंग का अड्डा बना दिया है. गारंटी के साथ प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं. लोगों को सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं. जो अब तक नहीं हुआ वह तक की बातें कही जा रही है.

ईमानदारी गई.

एक-एक बंदा डरा हुआ दिखता है. समझाया कुछ जाता है, बेचा कुछ और जाता है. इसमें केवल प्रोडक्ट देने वालों की गलती नहीं है. लेने वाला भी अपना होम वर्क नहीं कर रहा है.

कोई एलआईसी का फैन है. उसे म्यूच्यूअल फण्ड भी एलआईसी का ही चाहिए. किसी को टर्म insurance चाहिए लेकिन ऐसा जिसमें प्रीमियम वापस हो जाए. इसमें तो लेने वाले की गलती है. कैसे उन्हें समझाया जाए?

तो आप इन्वेस्टर लोगों से फिर एक बार अपील….

रूल नंबर 1. insurance के साथ इन्वेस्टमेंट वाला प्रोडक्ट ख़राब होता है. इसका मतलब NO टू एंडोमेंट एंड ULIP.

रूल नंबर 2. जो भी आप ले रहे हैं, उसके बारे में थोड़ा होम वर्क कीजिए. म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? कैसे काम करता है, इसे पढ़िए.

क्यों आपको म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना चाहिए?

जीवन को अगर मूल रूप से तीन भाग में बांटे तो हम पाएंगे की पहली अवस्था में हम पढ़ाई करते हैं. ये पढ़ाई हमारी 21 साल से लेकर 30 साल तक चलती है. 21 साल में हम ग्रेजुएट हो जाते हैं और 30 साल में किसी को भी पीएचडी की डिग्री मिल जाती है.

दूसरा चरण होता है कमाने का. इसमें कोई भी 18 की उम्र से लेकर 60 साल तक काम करता है. छोटा काम नहीं छोटी कमाई वाला काम. क्योंकि काम छोटा नहीं होता है. कमाने का मूल कारण…सिंपल…अपने और अपने परिवार के लिए हर वो जरूरत की चीज पूरी करना जो हमें चाहिए…या हम उसकी इच्छा रखते हैं. चाहे वो रोज का खाना हो या रहने के लिए घर. बच्चे की पढ़ाई हो या बच्चे की शादी. हर एक चीज को पूरा करने के लिए हमें पैसे की जरूरत पड़ती है.

तीसरा चरण होता है, रिटायरमेंट. जब हम काम नहीं करते हैं लेकिन पैसे की जरूरत हमें तब भी होती है. वो पैसे चाहे हमें हमारे बच्चे दें या फिर हमने जो पैसे अपने रिटायरमेंट के लिए जोड़े, बचाए हुए हैं, उसे खर्च करें. पैसे की जरूरत तो पड़नी ही है.

………

तो अगर हम पैसे बचा रहे हैं तो उसे लगाये कहां, जिससे उसमें से हमें ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिले. रिटर्न का सीधा मतलब ये कि हमने जहां भी पैसे लगाये हैं वो हमें ज्यादा से ज्यादा पैसे दे.

कोई भी इंसान सबसे ज्यादा पैसे अपने काम से कमाता है. और दूसरा अपने इन्वेस्टमेंट से. आप म्यूच्यूअल फण्ड में पैसे लगायेंगे तो आपको अपने इन्वेस्टमेंट पर 10-15 परसेंट या उससे भी ज्यादा का रिटर्न मिलेगा. ये रिटर्न पाने के लिए आपको कम से कम म्यूच्यूअल फण्ड में 10 या उससे ज्यादा साल तक इन्वेस्ट करना होगा.

HDFC TOP 200 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इसने किसी भी 10 साल में 14 परसेंट से कम का रिटर्न नहीं दिया है जबकि ऊपर की साइड पर इसने दस साल में 31 परसेंट तक का भी रिटर्न दिया है. इससे ज्यादा का रिटर्न आपको किसी भी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट से नहीं मिलेगा.

एंडोमेंट पालिसी, ULIP पालिसी कभी नहीं लेनी चाहिए. बाकी पीपीएफ, बैंक एफडी, आरडी ये सब रिटर्न के मामले में बहुत पीछे हैं.

सुकन्या समृद्धि अकाउंट: माता-पिता दें बेटियों को गिफ्ट

Sukanya Samriddhi Account, saving account, bank, beti bachao

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भारत सरकार ने देश में पैदा होने वाली लड़कियों को ध्यान में रखकर 2 दिसम्बर 2014 से ‘सुकन्या समृद्धिअकाउंट’ की शुरुआत की है. यह बहुत बढ़िया और खास अकाउंट है. इस अकाउंट की खास बात यह है कि इस बचत योजना के तहत सरकार द्वारा सबसे ज्यादा ब्याज देने की घोषणा की गई है. इस खाते के तहत जमा पैसों पर 9.1 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा.

आइये जानते हैं इस अकाउंट के बारे में

  • कौन खुलवा सकता है?

कोई भी माता-पिता अपनी बेटी के नाम पर यह खाता खुलवा सकते हैं. 1 दिन की उम्र से लेकर 10 साल तक की उम्र तक के बेटी के लिए उसके माता-पिता यह अकाउंट खुलवा सकते हैं.

 

  • कैसे खुलेगा यह अकाउंट?

इस अकाउंट को खुलवाने के लिए बेटी का जन्म प्रमाण पत्र और घर का पता होना जरूरी है.

 

  • कहां खुलेगा यह अकाउंट?

देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस या व्यवसायिक बैंक में यह अकाउंट खोला जा सकता है. साथ ही यह पूरे देश भर में कही भी ट्रान्सफर भी हो सकता है.ssa1

 

  • कितने अकाउंट?

कोई भी माता-पिता अपनी बेटी के नाम पर अकाउंट खुलवा सकते हैं. लेकिन इसकी कुछ सीमा है. माता-पिता दो से ज्यादा बेटियों के नाम पर यह नहीं खुला सकते हैं. हां, इसके साथ कुछ अपवाद भी जोड़े गए हैं. अगर किसी को पहली बार एक बेटी होती है और दूसरे बार में जुड़वां बेटी होती है तो, वैसे केस में तीनों लड़कियों का अकाउंट खुल सकता है. इसके अलावा अगर पहली बार में ही मां तीन लड़कियों को जन्म देती है तो भी उन तीनों के नाम पर सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुल सकता है.

 

  • साल में कितना पैसा जमा कर सकते हैं?

यह अकाउंट 1000 रुपये से खुल सकता है. साल में आप इसमें 150000 रुपये से ज्यादा नहीं डाल सकते हैं. अगर किसी साल आपने पैसे नहीं डाले तो 50 रुपये के जुर्माने के साथ आप इस अकाउंट में फिर पैसे डाल सकते हैं.

 

  • पैसा कब-कब निकल सकता है?

खाता खोलने के 21 साल बाद इस अकाउंट से आप पूरे पैसे निकाल सकते हैं. उससे पहले लड़की के 18 साल पूरे होने पर जमा पैसे का 50 प्रतिशत आप लड़की की शादी, पढाई के लिए निकाल सकते हैं.

 

  • कितना ब्याज?

इस साल के लिए सरकार ने 9.1 प्रतिशत का ब्याज निर्धारित किया है. जो अब तक के किसी भी सेविंग अकाउंट में सबसे ज्यादा है. हर साल सरकार इसकी ब्याज दर को निर्धारित करेगी.

 

  • टैक्स छूट?

3 दिसम्बर 2014 को जरी हुए गजट के अनुसार सरकार ने अब तक इसके टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं की है.

 

यह सरकार का एक अच्छा कदम है लेकिन 9.1 फीसदी के ब्याज से पढाई के बढ़ते खर्च को मैनेज किया जा सकता है, थोड़ा मुश्किल जान पड़ता है. बावजूद इसके यह एक अच्छा प्रोडक्ट है.

ये 10 Resolutions आपके आने वाले साल को बेहतर कर देंगी

नया साल बस कुछ दिन दूर है. सब आने वाले साल को बेहतर से बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं. ऐसे में आप भी अपने पर्सनल फाइनेंस को बेहतर कर सकते हैं. नीचे ऐसे 10 उपाय बताए गए हैं जो जिससे आप इसको अच्छा बना सकते हैं.

  1. Insurance और इन्वेस्टमेंट को हमेशा अलग रखना

Insurance हर एक के लिए बेहद जरूरी चीज है. ये हर उस कमाने वाले के पास जरूर होना चाहिए जिसके पीछे उसकी ‘जिम्मेदारियां’ हैं. लेकिन insurance लेते वक़्त इसका खासा ख्याल रखा जाना चाहिए कि इसके साथ इन्वेस्टमेंट का फीचर ना जुड़ा हो. insurance और इन्वेस्टमेंट को हमेशा अलग-अलग देखना चाहिए.

2. इन्वेस्टमेंट आपको केवल गोल को ध्यान में रखकर करना है.

पैसे हैं इसलिए म्यूच्यूअल फण्ड ले लिया. पैसे हैं इसलिए एफडी करा ली. पैसे हैं इसलिए पीपीएफ अकाउंट खुलवा लिया. ये नहीं होना चाहिए. हर इन्वेस्टमेंट के साथ कोई खास गोल जरूर होना चाहिए. आखिर आप इन्वेस्टमेंट क्यों कर रहे हैं? इससे आपको सही-सही अपने इन्वेस्टमेंट का टाइम और इसमें कितना इन्वेस्ट करना है ये पता चलेगा.

  1. हर साल आप इन्वेस्टमेंट को 5 प्रतिशत बढ़ा देंगे

आप इन्वेस्टमेंट करते हैं ये अच्छी चीज है. लेकिन उसके बीच में आड़े आता है महंगाई. इस महंगाई से लड़ने के लिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप अपने इन्वेस्टमेंट में कम से कम 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हर साल कर दे. जिससे आपको वो पैसे मिल जाए.

  1. अपने बच्चों को फाइनेंस के बारे में सिखाइए

आपने अपने जीवन में फाइनेंस को लेकर जो गलतियां की हैं वो आप अपने बच्चों को करने मत दीजिये. क्योंकि आपके पैसे कल आपके बच्चे के पैसे हो जायेंगे. और वो भी उन गलतियों को करके फाइनेंस के बारे में सीखे, क्या फायदा! इसलिए बच्चों के फाइनेंस टीचर आप बन जाइये.

  1. कमाई – इन्वेस्टमेंट = खर्च

ये फार्मूला फाइनेंस जीवन का सार है. इसे हर एक इंसान को समझना चाहिए. इससे पहले कि आप किसी फाइनेंसियल झंझट में फंस जाएं और निकलना मुश्किल होने लागे. इस सूत्र को अपनाइए. ये कभी मत कीजिए कि कमाई से मिले पैसे को खर्च कीजिए और जो पैसा बच जाए उसे इन्वेस्ट कीजिए. ये एक गलती है.

  1. इमरजेंसी फण्ड एक बेहद जरूरी फण्ड

उस समय की सोचिये जब आपकी गाड़ी ख़राब/एक्सीडेंट हो जाए और आपको उसे बनवाने के लिए 30 हजार रुपये देने हों. आप क्या करेंगे? हर इंसान के जीवन में ना जाने कई बार ऐसी इमरजेंसी आती है. जब उसे पैसे की जरूरत एक दिन के अंदर होती है. पैसे तो उसके पास होते हैं लेकिन शेयर, म्यूच्यूअल फण्ड, एफडी, पीपीएफ, गोल्ड, रियल एस्टेट जैसे जगहों पर लगे होते हैं. इसलिए इमरजेंसी फण्ड को जरूर रखना चाहिए.

  1. शॉपिंग को लेकर आलसी बनिए.

शौक और जरूरत में फर्क है. आप अपने शौक को कभी पूरा नहीं कर सकते. ये ख़त्म नहीं होने वाली चीज है. जरूरत को आपको पूरा करना ही है. इसलिए जरूरत की चीजे खरीदिये, शौक सप्ताह या महीने में एक बार पूरा कीजिए. उससे भी बड़ी चीज, शॉपिंग शौक नहीं होता है.

  1. फाइनेंस के लिए पढ़िए ना कि देखिये

मेरा अपना मानना है कि किसी भी चीज को समझने और जानने के लिए उसके बारे में पढ़िए ना कि देखिये. टीवी आपको छिछली जानकारी भर देगा. ये कई बार आपको कंफ्यूज भी कर सकता है. इसलिए अच्छी किताबों, मैगजीन और न्यूज़पेपर को पढ़िए.

  1. सुबह उठिए और एक्स्सरसाइज़ कीजिए

ये एक ऐसा तरीका है जिससे पैसे का कोई सीधा लेना देना नहीं है लेकिन ये आपके काफी पैसे बचाता है. आप सुबह उठेंगे, सुबह-सुबह कसरत करेंगे आप अपने कितने पैसे बचायेंगे इसका आपको कभी अंदाजा नहीं होगा. क्योंकि अंदाजा लगाने के लिए आपको बीमार होना पड़ेगा. कई सारे रोग पालने पड़ेंगे, उनसब डॉक्टर और दवाई का खर्चा देना होगा, जो आपकी इस आदत से आपको नहीं होगा.

10.अच्छे लोगों के साथ दोस्ती कीजिए

अपने जीवन में अच्छे दोस्त बनाइये. एक अच्छा दोस्त आपको कई ख़राब दोस्तों की संगति से बाहर निकाल सकता है. क्योंकि संगत ख़राब तो आपके पैसे निश्चित रूप से ख़राब होंगे. अच्छे दोस्त अच्छी सलाह और अच्छा समय देंगे. उन्हें पहचानिए.

बस. इन 10 को आने वाले साल में अपने जीवन का हिस्सा बनाइये और अच्छी फाइनेंस लाइफ के साथ खुश रहिये. Happy New Year :)

 

 

 

सेविंग और इन्वेस्टमेंट में फर्क है मेरे दोस्त!

अच्छा है लेकिन बहुत अच्छा नहीं है. क्योंकि आप पहले स्टेप को तो समझ पाए लेकिन उसके मूल अंतर को नहीं…

सेविंग और इन्वेस्टमेंट एक नहीं होता है. दोनों में एक बुनियादी फर्क ये है कि एक आपके पैसे को बढ़ाता है और दूसरा आपके पैसे को जोड़ता है.

सेविंग = 1 + 2 + 3 + 1 + 7 = 14

इन्वेस्टमेंट = 1 + 2 + 3 + 1 + 7 = 20 हो जाए….

इसको और थोड़ा सिंपल शब्दों में कहूं तो ऐसे समझिये कि आपके जोड़े हुए पैसे से महंगाई को आप मात दे पा रहे हैं या नहीं. अगर जवाब हां है तो आप इन्वेस्ट कर रहे हैं और अगर जवाब ना है तो आप महज केवल सेविंग कर रहे हैं.

क्योंकि महंगाई तो बढ़ेगी ही…कम से कम भारत की बात की जाए…जापान में महंगाई गिर रही है.

अगर आप अपने बैंक अकाउंट में इमरजेंसी फण्ड के अलावा 1 लाख रुपये रखते हैं तो आप ‘धनवान नासमझ’ हैं. आपको फाइनेंसियल अलिफ़, बे, पे…. समझने की जरुरत है.

पहला पायदान है कि आप बचाइए और दूसरा कि आप इन्वेस्ट कीजिए….

महंगाई से लड़ने के साधन जानिए….

सो कर आप पैसे बढ़ा सकते हैं…

तकनीक ने लोगों की नींद हराम कर रखी है. वो ठीक से सो ही नहीं पाते हैं. WhatsApp, फेसबुक के नोटिफिकेशन लोगों को हर दूसरे मिनट फ़ोन देखने के लिए मजबूर कर देते हैं.

फाइनेंस के साथ भी यही हो रहा है. तकनीक ने लोगों के इन्वेस्टमेंट वैल्यूएशन को बताने का काम इतना आसान कर दिया है कि वो उस इन्वेस्टमेंट की वैल्यूएशन हर दिन, कई बार तो दिन में 5 बार तक देखते हैं.

इक्विटी मार्किट ने लोगों को जितना दिया है उससे कहीं ज्यादा लोगों को मिल सकता था लेकिन वो वैल्यूएशन देख उसको पे आउट करा लेते हैं. यकीन मानिये अगर आप अपने इन्वेस्टमेंट के साथ 15-20 साल बने रहेंगे तो आप उसके साथ अच्छा न्याय कर पाएंगे.

इन्वेस्टमेंट को कर के ‘सो जाइये’. साल में जरुर उसको 6 महीने साल भर में नजर डालिए.

2000 रुपये महीने के साथ आप करोड़ों कमा सकते हैं. लेकिन मुमकिन है कि आप महीने के 10000 रुपये इन्वेस्ट कर करोड़ तक भी ना पहुंच पाएं.

कैसे….इसे पढ़िए….. रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग

दो दोस्तों के इन्वेस्टमेंट का फर्क