मैं जब केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ता था तो स्कूल फी महज 5 रूपए महीने लिए जाते थे. जिसे एक साथ तीन-तीन महीने में देना होता था. बाद के दिनों में ये बढ़कर 15 रुपये महीने हो गया.

केंद्रीय विद्यालय की वेबसाइट से पता चला कि अब ये बढ़कर कुछ 400 रुपये महीने हो गया है.

इस स्कूल के फी बढ़ने को ही महंगाई कहते हैं. फी की ही तरह खाना-पीना भी महंगा होता रहता है. दवाई से लेकर पान तक साल दर साल महंगा होता जाता है. पिछले 30 साल के महंगाई के आंकड़ों को देखे तो ये ऊपर नीचे होता रहता है लेकिन औसतन ये 6-6.5 फीसदी की दर से बढ़ रहा होता है.

आप सब लोग भी उन चीजों के बारे में पता लगाइए जिसे आप 15-20 साल पहले यूज़ करते थे. उसकी तब क्या कीमत थी और आज क्या कीमत है. आप खुद अंदाजा लगा पाएंगे कि महंगाई कैसे दीमक बन जाता है.

अब आप इन सब चीजों को पाने के लिए कुछ पैसे बचाते हैं या यूं कह लीजिये इन्वेस्ट करते हैं. अगर इस इन्वेस्टमेंट से आपको 6 प्रतिशत से ज्यादा के दर से पैसा मिल रहा है तब तो ठीक है. वरना…वरना ये कि आपने पैसे जमा किये…10 या 20 साल बाद जब वो पैसा मिला तो उस पैसे की वही वैल्यू है जो 10-20 साल पहले आपने जमा किया था. तो इसे ही कहते हैं कि आपके पैसे को महंगाई खा गई.

एक नजर उन प्रोडक्ट पर जो औसतन कितने का रिटर्न देते हैं.

 

प्रोडक्ट कितना इंटरेस्ट टैक्स लगेगा या नहीं
सेविंग अकाउंट 4-6 % टैक्स लगेगा
एनएससी 5 साल 8.5 % टैक्स लगेगा
एनएससी 10 साल 8.80 % टैक्स लगेगा
बैंक एफडी 8.5 % टैक्स लगेगा
पीपीएफ 8.7 % टैक्स नहीं लगेगा
किसान विकास पत्र 8.7 % टैक्स लगेगा
LIC (जीवन आनंद) 6-7 % टैक्स नहीं लगेगा
यूलीप प्लान 9 % टैक्स नहीं लगेगा
म्यूच्यूअल फंड 12-18 % टैक्स नहीं लगेगा

 

अब इसके आधार पर आप अपना इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट चुन सकते हैं. ऐसे प्रोडक्ट को चुनिए जो महंगाई से लड़ने की ताकत रखता है. वरना…वरना आपका पैसा अपनी ताकत खो देगा.