मेरे एक भाई हैं. मौसेरे भाई. उनके अनुसार 2 महीने पहले तक वो म्यूच्यूअल फण्ड के नाम से चिढ़ते से थे. लेकिन अब उन्हें ‘शायद’ वो डर खत्म हो गया है. शायद शब्द इसलिए कि अब उन्हें अब भी बाजार का सही-सही अंदेशा नहीं है. ऐसा मुझे लगता है. खैर वो डर जाते-जाते जाएगा. अगर वो अनुशासन में रहें तो.

तो ये खास पोस्ट उन्हीं जैसे लोगों को सोचते हुए लिख रहा हूं….

म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियां कई स्कीम के तहत इन्वेस्टर से पैसे जमा कर उसे उन स्कीम के हिसाब से स्टॉक मार्केट, बांड्स, डिबेंचर में लगाती हैं. इन स्कीम चलाने वाली कंपनियों को म्यूच्यूअल फण्ड हाउस या एसेट मैनेजमेंट कंपनी या फिर एएमसी कहते हैं. जिनमें एचडीएफसी म्यूच्यूअल फण्ड, आईसीआईसीसी म्यूच्यूअल फण्ड, बिरला सन लाइफ म्यूच्यूअल फण्ड, रिलायंस म्यूच्यूअल फण्ड और यूटीआई म्यूच्यूअल फण्ड जैसे करीब 44 नाम शामिल हैं.

इनके कई सारे स्कीम होते हैं. हर का अपना एक गोल होता है, उसी के अनुसार से वो बाजार में पैसा लगाते हैं. इसलिए अगर आप खुद से किसी म्यूच्यूअल फण्ड में पैसे लगाने जा रहे हैं तो उसके ऑब्जेक्टिव को जरूर पढ़िए और समझिये.

जितने सारे स्कीम हैं, उनको मूल रूप से दो तरीके से बांटा जा सकता है.

  1. ओपन एंडेड स्कीम: ऐसे फण्ड में आप कभी भी पैसे डाल सकते हो और कभी भी पैसे निकाल सकते हो. इसमें पैसे लगाने पर कोई एंट्री चार्ज नहीं लगता है लेकिन अगर आप 365 दिन से पहले पैसे निकालते हैं तो वो आपसे 1 से 1.5 परसेंट तक चार्ज करते हैं.
  2. क्लोज एंडेड स्कीम: ये फण्ड समय-समय पर फण्ड हाउस निकलते रहते हैं. इसमें पैसा डालने पर आपका पैसा एक निश्चित समय तक लॉक हो जाता है. वो समय पूरा होने के बाद ही आप उसमें से पैसा निकाल सकते हैं. अमूमन ये लॉक इन पीरियड 3 साल का होता है. ये इससे ज्यादा भी हो सकता है.

 

गोल के हिसाब बांटा गए स्कीम

1). इंडेक्स फण्ड: इस तरीके का फण्ड मूल रूप से सेंसेक्स और निफ्टी के उन इंडेक्स में पैसा लगाता है जो वहां ट्रेड होते हैं. बैंकिंग इंडेक्स, निफ्टी इंडेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स…ऐसे ही कई तरीके के इंडेक्स फण्ड होते हैं.

2.) इक्विटी फण्ड: ये लोगों फण्ड मैनेजर के साथ-साथ इन्वेस्टर का भी चहेता फण्ड होता है. इसमें शेयर मार्केट के सभी तरीके के स्टॉक शामिल होते हैं. लार्ज कैप, मिड कैप, स्माल कैप के अलग-अलग स्कीम होते हैं. ऐसे फण्ड का ज्यादातर पैसा इक्विटी मार्केट में लगता है. अगर आपका नजरिया 15-20 साल का है तो आप इसमें पैसा लगा कर अच्छा पैसा कमा सकते हैं.

3.) बैलेंस्ड फण्ड: इसका फण्ड मैनेजर बड़ा ही एक्टिव होता है. ये मीडियम रिस्क वाला फण्ड होता है, जिसमें पैसा डेट और इक्विटी के बीच शिफ्ट होता रहता है. लंबे समय के लिए ये भी एक अच्छा फण्ड है.

4.) डेट फण्ड: अगर आप एफडी में पैसा लगाते हैं तो फिर आप डेट फण्ड में पैसा लगाइए. आपको एफडी से ज्यादा रिटर्न मिलेगा. डेट फण्ड का पैसा गवर्नमेंट सिक्यूरिटी, बांड्स, कॉर्पोरेट एनसीडी में लगता है.

5.) ईएलएसएस फण्ड: अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगा कर टैक्स बचाना चाहते हैं तो फिर आपको ईएलएसएस फण्ड में पैसा लगाना चाहिए. लेकिन इसमें एक शर्त होती है. आप इसमें से पैसा 3 साल से पहले नहीं निकाल सकते हैं. बाकी अन्य टैक्स सेविंग प्रोडक्ट की तरह इसमें 5 साल से कम का लॉक इन होता है. इसलिए ये लोगों के बीच खासा मशहूर है. अब टैक्स बचाने की लिमिट 1.5 लाख रुपये हो गई है.

6.) लिक्विड फण्ड: अगर आपके पास कोई जरुरी पैसा है कुछ दिनों के लिए घर पर या आपके सेविंग अकाउंट में रखा हुआ है तो आप उस पैसे को लिक्विड फण्ड में डाल सकते हैं. ये फण्ड लो रिस्क फण्ड होता है. 2 महीने से लेकर एक साल तक ऐसे पैसे को लिक्विड फण्ड में रखा जा सकता है.

इसके अलावा ग्रोथ और डिविडेंड पेआउट आप्शन भी म्यूच्यूअल फण्ड का ही हिस्सा होता है. ग्रोथ आप्शन में आपका डिविडेंड का पैसा रिइन्वेस्ट हो जाता है जबकि डिविडेंड पेआउट में आपका डिविडेंड आपके अकाउंट में ट्रान्सफर कर दिया जाता है.

तो ये म्यूच्यूअल फण्ड का बेसिक है.

उम्मीद करता हूं कि इसको पढ़ कर मेरे भईया और उनके जैसे तमाम लोगों को थोड़ी और जानकारी मिली होगी.

 

आप इससे जुड़े हुए सवाल, प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें. मैं आपके उत्तर देने की कोशिश करूंगा.