रिटायरमेंट के लिए कब प्लान करना चाहिए?

क्या आपने अबतक अपने रिटायरमेंट को लेकर प्लान किया है? बहुमत लोगों का जवाब NO में होगा. लेकिन क्या इसे लेट करते जाने का आप इफ़ेक्ट समझते हैं? ये आपको संकट में डाल सकता है. इसको समझने के लिए आप इस विडियो को देख सकते हैं. ये विडियो दिल्ली के सीपी में खिलौने बेचने वाले एक बैंक कर्मचारी का है, जिनकी अब उम्र 70 से ज्यादा हो चुकी है.

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PV Saar, puppet seller

मैं अंदाजा लगा सकता हूं कि इसे देखने के बाद आप लोग क्या सोच रहे होंगे. लेकिन ये जीवन की कड़वी सच्चाइयों में से एक है. हम में से कितने लोग उम्र के उस पड़ाव में इतना मेहनत करने को तैयार हैं? रिटायरमेंट के बाद लोग जीवन का आनंद लेना चाहते हैं.

क्या आप भी रिटायरमेंट के बाद जीवन का आनंद लेना चाहते हैं? इसके लिए आपको अभी से प्लान करना होगा. अगर आपकी उम्र 25 साल है और आपकी अभी नौकरी लगी है तो आप हर महीने 1500 रुपये म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करेंगे तो जब आप 55 के होंगे तब आपके पास 11302440 रुपये होंगे.

अगर आप 35 साल के हैं और हर महीने के 5000 रुपये इन्वेस्ट करते हैं तो जब आप 55 के होंगे तो आपके पास लगभग 3796844 रुपये होंगे. कहने का मतलब है कि आप कम उम्र में कम इन्वेस्ट कर ज्यादा कमा सकते हैं. (Investment return assume 10 % p.a.)

आप अपने रिटायरमेंट अमाउंट के बारे में खुद अनुमान लगाइए कि जब आप 55 या 60 के होंगे तो आपको कितने पैसे की जरुरत होगी. हालांकि इसको कैलकुलेट करते हुए महंगाई को जरुर ध्यान रखियेगा.

जब आप लम्बे समय के लिए इन्वेस्टमेंट करने की सोचते हैं तो म्यूच्यूअल फण्ड के अलावा पीपीएफ सहायक हो सकता है. कोई भी रिटायरमेंट प्लान लेना समझदारी भरा कदम नहीं होगा.

रिटायरमेंट कार्पस के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से बेहतर प्रोडक्ट और कोई नहीं है क्योंकि इसमें आपको लम्बे समय के लिए निवेश करना होता है.
लेकिन इसका ध्यान रखा जाना चाहिए कि जब आप म्यूच्यूअल फण्ड लेते हैं तो बीच-बीच में इसका रिव्यू करते रहें.

आपके पास कितने का लाइफ Insurance होना चाहिए?

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क्या आपने अपने जीवन की कीमत लगाई है? बहुतों का जवाब नहीं में होगा. आपने किसी भी कंपनी से अपने लिए Insurance ख़रीदा हो या एजेंट ने दे दिया हो, उसमें आपके जीवन की कीमत क्या है? क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की, कि ये जो भी कीमत है वो आपके लिए उचित है भी या नहीं.
बीमा आग्रह की विषय वस्तु है. ये लाइन हर Insurance कंपनी को प्रचार करते हुए लिखना जरुरी है. लेकिन भारत में लोगों के बजाय एजेंट बीमा लेने का आग्रह करते हैं. और एजेंट ‘अपने पसंद’ और पाने वाले कमीशन के हिसाब से आपको कुछ ‘पकड़ा’ कर चला जाता है. ये आपके लिए सही है, नहीं है…इसकी परवाह किये बिना वो आपको दे देता है. उसका आपके जीवन की कीमत से भले कोई लेना देना हो या ना हो.

भारत में अक्सर Insurance एजेंट लाइफ Insurance के साथ इन्वेस्टमेंट भी मिला देते हैं. जो सही नहीं है. एजेंट आपको भविष्य की गुलाबी तस्वीर और आंकड़े बता कर पालिसी दे कर चला जाता है. लेकिन समय बीतने के साथ उसपर से गुलाबी रंग उतरने लगता है और आंकड़े गडमड होने लगते हैं.

लाइफ Insurance की मूल चीज़ लाइफ को प्रोटेक्ट करने के लिए बनी है ना कि इन्वेस्टमेंट के लिए.

तो बात आती है कि आखिर आप अपने जीवन की कीमत को कैसे कैलकुलेट करेंगे?

मैं एक उदहारण देखर इसे समझाने की कोशिश करता हूं.

मान लीजिए की ब्रजेश की उम्र 30 साल है और उसकी पत्नी मोहिनी की उम्र 25 साल है. और उनदोनों को एक बच्चा भी है.

1.    ब्रजेश जो अपने घर के लिए अकेला कमाने वाला है उसके घर का खर्चा हर महीने करीब 20 हजार रुपये है.
2.    ब्रजेश के पास एक घर है जिसका होम लोन करीब 25 लाख रुपये है.
3.    बच्चे की पढाई और शादी के लिए उसे 20 लाख रुपये चाहिए.

ब्रजेश अपने जीवन को 70 साल तक देखता है.

1.    ब्रजेश को लगभग 21 लाख रुपये अपने घर खर्च के लिए चाहिए जब वो 70 साल का हो जायेगा.
2.    इस बीच में अगर ब्रजेश को कुछ हो जाता है तो Insurance के पैसे से होम लोन चुकाया जा सके.
3.    ब्रजेश के बच्चे के लिए आज की पढाई और शादी को जोड़ कर उसका अनुमान लगाया जाता है.

कुल मिलकर कहानी यह बनती है ब्रजेश आज साल का जितना कमाता है उसका 15-20 गुना का Insurance कवर उसके पास होना चाहिए.

लेकिन भारत में लोगों के पास जितने साल की कमाई होती है उतने का ही कवर भी होता है. जो उस खास के फाइनेंसियल लाइफ के लिए सही नहीं है.
ये कवर किसी ULIP पालिसी या फिर एंडोमेंट पालिसी से नहीं मिल सकती है. इसके लिए टर्म प्लान ही लेना ही एकमात्र और सबसे बेहतर उपाय है. जो आजकल ऑनलाइन बहुत सस्ते कीमत पर मिल रहा है.
तो आज ही अपने जीवन कवर को सुरक्षित कीजिये और ऑनलाइन टर्म Insurance लीजिए. यही आपको असल जीवन की कीमत का कवर देगा.
बाकी अपने भविष्य के जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्वेस्टमेंट के बाकी तरीकों को अपना सकते हैं. जिनमें PPF, Mutual Fund प्रमुख हैं.

Invest करें: क्यों, कहां और कैसे?

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दुनिया के किसी भी कोने कोई भी वर्ग हो, निवेश जरुर करता है. कई बार प्रत्यक्ष तो कई बार अप्रयत्क्ष. किसी को लगता है कि इंश्योरेंस निवेश का सबसे सही जगह है तो किसी को इक्विटी तो किसी को डेट मार्किट अच्छा लगता है. कोई कहता है कि बच्चों को अच्छा पढ़ाइये, यही सबसे अच्छा निवेश है.
सब की अपनी समझ है और उसी हिसाब से वो अपना निवेश प्लान करते हैं. लेकिन असल में निवेश क्या है? और हम यहां ये समझने की कोशिश करेंगे की निवेश क्यों, कहां और कैसे करना चाहिए?
निवेश उस प्रकिया को कहते हैं जिसमें कोई पैसे को ऐसी चीज पर लगाता है, जिससे उसको महंगाई के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिले.

क्यों:
जब कोई इंसान कमाना शुरू करता है तो पहले पहल उसके पास कम जिम्मेदारियां होती हैं और उसे पैसे कम मिलते हैं. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसपर जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और पैसे भी बढ़ते हैं. इन सब का सामंजस्य बिठाने के लिए उसे निवेश का रास्ता चुनना चाहिए.
महंगाई और कमाई के बीच की तुलना करके ऐसी चीज में निवेश करना चाहिए जहां उसे ज्यादा रिटर्न मिल सके.

कहां:
निवेश करने की कई जगह हैं. शेयर मार्केट, म्यूच्यूअल फण्ड, डेट मार्केट, कमोडिटी मार्केट, गोल्ड, रियल एस्टेट आदि. इन सब जगहों पर निवेश करने के लिए आपको थोड़ी जानकारी जरुर होनी चाहिए.
शेयर मार्केट में जहां आपको अपनी समझ से निवेश करना होता है वहीं म्यूच्यूअल फण्ड में आपके पैसे को जानकारों की एक टीम आपके लिए निवेश करती है.

कब:
निवेश जितना जल्दी शुरू किया जाये, उतनी जल्दी अच्छा होता है.

10 चीजें जो आपकी Financial Life को गडमड कर देंगी

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10 चीजें जो आपकी वितीय जीवन को गडमड कर देंगी
आज के जीवन में हर एक अपनी लाइफ को प्लान करके चल रहा है. इसमें भी फाइनेंस की प्लानिंग सबसे अहम् है. आप अपनी एक छोटी सी भूल के कारण बड़ी वितीय संकट में फंस सकते हैं. इस कारण आपको उन चीजों को जानना जरुरी है जो आपको वितीय अंधेरे की ओर ना ले जाये.
पेश है वो दस बातें जिससे आपको भी सावधान रहना जरुरी है.
1.    अधिक जानकारी रखना- आज सूचना तकनीक हर घर में मौजूद है. बस एक क्लिक किया और जो जानकारी आपको चाहिए वो आपको मिल जाएगी. फाइनेंस से जुड़ी हुई जानकारियां भी आपको कई सारी वेबसाइट पर मिल जाएंगी. सभी एक ही प्रोडक्ट को अलग-अलग ढंग से देखते हैं और उसका रिव्यू करते हैं. साथ ही उनमें आये कमेंट भी अलग अलग बातें बताते हैं. जिसके बाद एक सामान्य निवेशक कंफ्यूज हो जाता है. और वो सही ढंग से निर्णय नहीं ले पता है. इस कारण हो सके तो सर्टिफाइड फाइनेंस प्लानर की सलाह लेनी चाहिए.

2.    वितीय संकट केवल पड़ोसियों को होते हैं- हमें अपने खान पान और रहन-सहन को लेकर पूरा भरोसा है. हमें या हमारे परिवार को कुछ नहीं होगा. हमारा जीवन सुरक्षित है. दिक्कतें और परेशानी तो केवल पड़ोसियों और दोस्तों को होती है. ऐसा सोचने वाले की तादाद हमारे भारत में बहुत हैं. जबकि ऐसा होता नहीं है. बुखार और संकट बता के नहीं आते हैं. हमें इन सबके लिए पहले से तैयारी करके रखनी चाहिए.

3.    लाइफ इंश्योरेंस को निवेश समझना – सामान्य रूप से लोग लाइफ इंश्योरेंस में दो कारण से पैसा लगाते हैं. पहला वो अपना टैक्स बचाना चाहते हैं और दूसरा इसे ही वो अपना निवेश भी समझते हैं. ये एक भूल और गलती दोनों है. इसके कारण वो ना ही वो सही से निवेश कर पाते हैं और ना ही इंश्योरेंस कवर मिल पाता है.

4.    इक्विटी निवेश को ULIP मानना – कुछ लोगों ने एजेंट्स के कहने पर ulip में पैसा लगाया और अब उनको भरी loss हो रहा है. एजेंट ने तो उन्हें बताया था कि ये उनका पैसा शेयर मार्किट की ही तरह उछाल मारेगा और तीन साल में पैसा दुगना हो जायेगा. लेकिन अब 6 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें घाटा हो रहा है. अब उन्हें कोई शेयर मार्केट के बारे में कहता है तो उनका चेहरा लाल हो जाता है.

5.    इक्विटी मार्किट से डरना – अगर आपको लम्बे समय में कोई फाइनेंसियल गोल पाना है तो इक्विटी मार्केट से अच्छा और कोई जरिया नहीं है. यह महंगाई को मात देने वाला लम्बे समय का सबसे सुरक्षित तरीका है.

6.    रियल एस्टेट में बड़ा पैसा लगाना – अमेरिका में 2008 में आई मंदी की एक मुख्य वजह रियल एस्टेट भी था. लोगों ने घर तो खरीद लिए लेकिन धीरे धीरे उनके पास ईएमआई चुकाने के पैसे नहीं थे. भारत में आज तो रियल एस्टेट बाजार उछाल मार रहा है लेकिन कब ये गोते लगाएगा, इसके बारे में सही से कहा नहीं जा सकता. इस कारण रियल एस्टेट में बड़ा पैसा लगाने से बचना चाहिए.

7.    जरुरत और विलासिता के बीच फर्क ना कर पाना – आप अपनी जिंदगी में कई चीजें खरीदते हैं लेकिन उन सबका उपयोग आप साल दो साल ही खरीदते हैं. लेकिन महीने का 500 या 1000 रुपये के टर्म प्लान के लिए आप इन्वेस्टमेंट नहीं करते हैं. इसलिए जरुरत और विलासिता में फर्क करना सीखना चाहिए.

8.    अपने दोस्त की सलाह पर निवेश करना – ऐसे कई लोग हैं जो केवल अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के कहने पर अपना निवेश कर देते हैं. जबकि हर की जरुरत अलग-अलग होती है. अपनी जरुरत के हिसाब से अपना निवेश करना चाहिए.

9.    अपनों से निवेश को छुपाना – कई लोग निवेश तो करते हैं लेकिन ना ही उसका सही से डॉक्यूमेंटेसन करते हैं और ना ही अपने घरवालों को बताते हैं. लोगों को लगता है कि घरवालों को जानकारी होने से वो उनसे मांगने लगेंगे. जबकि किसी दुर्घटना होने पर वही आपके निवेश को सुरक्षित हाथों तक पहुंचा देंगे.

10.     निवेश को लेकर हमेशा निर्णय को टालते रहना – वो फाइनेंस प्लानिंग की जरुरत को समझते हैं. रिसर्च भी करते हैं लेकिन फिर कोई बहाना बना कर चीजों को टाल देते हैं. ये फाइनेंसियल व्यवहार सबसे ख़राब व्यवहार है.

Photo courtesy: Flickr, TechnoIndigo

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