उस नमक को भी खरोंचा था
बड़ा मीठा सा स्वाद था
जो आज भी है तुम्हारे.. चेहरे पर
कितना खरचा था
और ना जाने कितना खरच होगा
तेरी याद में मेरे.. आंसू
सालती है
वह हंसी और खुशी
जब अब मिली.. जुदाई
कि अब हमने सीखा
मौसम बदलने का मतलब
कई बार बदल देती है यह.. जिंदगी भी








कि अब हमने सीखा
मौसम बदलने का मतलब
कई बार बदल देती है यह.. जिंदगी भी
anoothe andaaz mein bahut khoob likha…
कि अब हमने सीखा
मौसम बदलने का मतलब
कई बार बदल देती है यह.. जिंदगी बहुत खूब सुंदर लिखा है आपने
राजेश जी
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है आप की रचना में. शब्द और भाव का अनूठा मिश्रण किया है आपने. बधाई…..
दूसरे मेरी कोई चाह बाल किशन जी की रचना को कम आंकने की नहीं थी, मैंने जो लिखा शुद्ध विनोद के लिए था. मेरे कमेन्ट से अगर आप आहत हुए हैं तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ…..
नीरज
क्या कहूँ यार …..आज बस हैरान हूँ ओर खुश भी हूँ….पढता हूँ ओर बस……निशब्द …..सच में बेहद आश्चर्य चकित खुशी दी है तुमने……..तीन बार पढ़ चुंका हूँ……
aor haan umeed karta hun ab mera blog padh pa rahe honge…..
बहुत सही… यार ये कविता शायरी मेरे जैसे लोग बस पढ़ ही सकते हैं
एक अनुपम और अद्भुत प्रयोग. बहुत खूब. जारी रहिये. आप मे असीम क्षमता है. शुभकामनाऐं.
सुन्दर अभिव्यक्ति!
वाह!
सुंदर रचना एवं गहरे भाव
बधाई.