सभी हिंदी ब्लागरों के लिए

एक गूगल समूह है। चिट्ठाकार। कई हिंदी ब्लागर आज भी उसके सदस्य नहीं हैं। शायद इसकी जानकारी ही नहीं है। इसका हिस्सा बनिए। अपनी राय दीजिए। दूसरों को भी जानिए। इसका सदस्य बनने से पहले इसके इस समूह का चार्टर जरूर पढि़ये। इस समूह के नियम बहुत कड़े हैं। लेकिन चूंकि समूह अच्छा है इसलिए आप सभी लोग इसका हिस्सा बनिए। सदस्य बनने के लिए इस लिंक में क्लिक कर अपना मेल आईडी और पासवर्ड के साथ लोगिन कीजिये ।

आप थोड़े बोर हो सकते हैं क्योंकि कभी-कभी इसमें हिंदी से जुड़ी तकनीकि जानकारियां पूछी जाती है। जो सहज रूप से समझ में आने वाली नहीं होती। बावजूद इसके यह समूह अच्छा है।

विज्ञापन में औकात की बात

मनोविज्ञान की एक थ्योरी है। आप किसी इंसान की आइडेंटिटी पर कुठाराघात करेंगे और वह अपना आपा खो बैठेगा। दो विज्ञापनों हैं, जो इसी मनोविज्ञान को कैश करने के लिए बनाए गए हैं।

पहला है, बिग बाजार का। लड़की का सामान गिरता है, लड़का उसकी मदद करता है। उसके बाद वह चलने को होता है तो उसके मोबाइल की घंटी बजती है। लड़की उसे कहती, चोर कहती। लड़का कहता है, मेरा है। लड़की कहती है, उसके पहनावे को देखकर कहती है औकात है तुम्हारी।

दूसरा है, यू टीवी का चैनल बिंदास पर आने वाला सीरियल चैम्प की। इसका प्रिंट एड है। कहता है, औकात है तो आगे निकल कर दिखाओ।

बचपन के दिनों से मैं लोगों को सुनता आया हूं। अपने औकात में रहो। जैसे ही कोई इसको कहता, दूसरा बिफर पड़ता। औकात का सीधा मतलब लोग पैसे से लेते हैं। और इन दोनों में पहला विज्ञापन पैसे को लेकर है तो दूसरा इगो को लेकर..। ज्यादातर युवा अपने दूसरे दोस्त से पीछे नहीं रहना चाहते।

मोनिट्री एंड इगो (पैसा और दंभ) का कोम्बिनेशन है यह औकात। इसे लेकर कंपनियां भी कुछ माल बटोरना चाहती हैं।

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