मेरे एक ब्लागरोल का नाम है। इसके मुतालिक अनुभवी ज्ञानदत्त पाण्डेय जी ने एक पोस्ट लिखा। बड़ा अच्छा पोस्ट लिखा है। पाठकगण आप लोग भी इसे पढ़े।
पूरा पोस्ट मैंने भी पढ़ा, वहां टिप्णणी देने के बजाए, सोचा एक पोस्ट लिख देता हूं। लिखने लगा तो दो शे’र याद आने लगे। शायर का नाम याद नही. किसी पाठक को पता हो तो जरुर बताये. अग्रिम धन्यवाद आप भी पढे़,
कहां से आ गई दुनिया कहां, मगर देखो
कहां-कहां से अभी भी कारवां गुजरता है।
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बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ जिंदगी, हम दूर से भान लेते हैं।







राजेश जी,
ये शेर लिखने से अच्छा होता कि आप पोस्ट ही लिख देते. पोस्ट पढ़कर शायद आपकी बात समझ में आ जाती. शेर पढ़कर तो नहीं आई.
शेर तो सही लिखो यार।
आपके लिये दो लाइना
शेरो का अब बन्द करो लूज मोशन
कुछ तो ढंग का लिखो राजेश रोशन
@आपका फैन
क्या मैंने जो शेर लिखा है, वो ग़लत है. जवाब मैं दे देता ह. नही है लेकिन फ़िर भी गलती बताने वाले को मेरे तरफ़ से पार्टी.
एक बात और बड़ा अच्छा शेर लिखा है, क्या तुक बंदी है. मोशन और रोशन. बेहतरीन. लेकिन अपनी इस उर्जा को आप किसी अच्छे जगह लगाते तो दाद देने वाले कई लोग होते. इन छोटी छोटी बातो से मैं नाहक परेशां नही होता आपका फैन जी
सुबह से तीसरी पोस्ट है आज ….मीर ओर ग़ालिब पर …..उम्मीद है रात तक चौथी ना हो जाये..
सब मीर मीर कह रहे हैं तो वही देखने आया था. यहाँ तो मेरे लिखा है, मीर कहाँ.
बधाई हो राजेश जी, हर तरफ़ आप का चर्चा है जहाँ से सुनिए.
वाह! मीर भी “मेरे” हैं। और हम तो मीर तो हो न सके, हो गये - अनुभवी!
शिव कहते हैं, पोस्ट लिख देते। मेरा विचार है - कमेण्ट लिख देते!
समीर जी
मीर खोपोली में है…आप को तो मालूम ही है और फ़िर भी पूछ रहे हैं… देखिये न ये सब लोग हमें कहाँ कहाँ ढूंढ रहे हैं….राजेश जी और शिव जी ने हमें कितना मशहूर कर दिया है…धन्यवाद बंधुओ हमें गुमनामी के अंधेरे से बाहर निकलने के लिए.
नीरज
गालिब said.
मैं एक दिन क्या अनुपस्थित हुआ सब ने मेरा और मरी शायरी का मजाक उड़ना शुरू कर दिया.
अब नहीं करूँगा कभी ब्लाग्बजी.
आप सब से नाराज हो गया हूँ.