यह जितनी बड़ी समस्या है, वैसी दिखती नहीं है। वह भी तब जब पृथ्वी पर 70 फीसदी पानी ही है। एक अनुमान के मुताबिक 200 करोड़ लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिल पाता है। और जिसके कारण हर साल औसतन लाखों लोगों की मौत होती है। यह समस्या छुपी हुई बेरोजगारी की तरह दिखती नहीं है। हम आप में से कई लोगों को साफ पानी नहीं मिलता है। कम से हम भारतीय इसको लेकर जितना लापरवाह हो सकते हैं, उससे ज्यादा लापरवाह हैं। कहने वाले तो यही कहते हैं कि अगला विश्वयुद्ध हुआ तो पानी के लिए ही होगा।
ऊर्जा स्रोतों की कमी
विश्वयुद्ध का तो पता नहीं लेकिन युद्ध तो इसके लिए शुरू हो भी चुके हैं। इराक पर अमेरिका का हमला, इसका मजमून है। अमेरिका अपने तेल के कुएं को बचा कर रख रहा है और हम भारतीय तेल को जलाने में लगे हुए हैं। कम ही परवाह है इसकी। हम सभी के घरों में जलने वाला बल्ब और रसोई में गैस इसके उदाहरण है। हमें ऊर्जा को बचाना चाहिए। कच्चा तेल कब 200 डालर प्रति बैरल हो जाएगा पता नहीं चलेगा। ठीक वैसे ही जैसे अभी कच्चा तेल दो साल में 70 डालर से 130 डालर तक पहुंच गया है। संभल जाइए..
जनसंख्या विस्फोट
यह विषय तो स्कूल में निबंध के रूप में आता था। अब कम ही सुनने को मिलता है। आदत हो गई है। 100 करोड़ जो पार कर गए। जोक्स बनने लगे थे, भारत किसी में तो नंबर-1 बन जाए। चीन ने अपने शिशु मृत्यु दर के साथ शिशु जन्म दर को भी रोका। हम भारतीय शिशु मृत्यु दर को तो रोक पाए लेकिन जन्म दर..। यह विस्फोट जैसा नहीं होगा। यह घर-घर की लड़ाई जैसा होगा। जहां भी जनसंख्या ज्यादा होगी, दिक्कतें वहीं होगीं। घर में हुई तो वहां प्रोब्लम, मोहल्ले में हुई तो वहां प्रोब्लम..जिला, राज्य से देश और विश्व तक..।
दिक्कतें और भी हैं..अगले पोस्ट में…








अच्छी सीरिज शुरू की आपने.
कम से कम जो लोग इनसे अवगत होते हुए भी इन समस्याओं को .भूल चुके हैं उनकी याददाश्त पर पड़ी धुल को साफ करने का काम करेगी आपकी ये पोस्ट.
बधाई.
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बढ़िया श्रृंख्ला. जारी रखें.
बहुत सही।
[…] का साफ पानी उर्जा स्रोतों की कमी जनसंख्या विस्फोट .. से आगे की बात करते […]