हिन्दी वर्तणी जांचक.. भविष्य में कईयों को पंगु बना देगा

अभी मैं विश्व की दस बड़ी समस्याओं के बारे में लिख रहा हूं कि एक हिंदी की आने वाली समस्या दिख गई। रवि रतलामी जी ने आज एक उपयोगी मशीनी हिन्दी वर्तणी जांचक से परिचय कराया। यह जितना उपयोगी होगा उतना ही दुरुपयोगी। इसका उपयोग कई हिंदी ब्लागर भी करेंगे। अभी भी कर रहे होगें। यह ठीक उस तरीके से जैसे गणित हल करना मत सीखो, कुंजिका से देख कर बना लो।

इसका उपयोग शुरुआती रूप हिंदी लिखने के लिए ठीक है, वह भी उनके लिए जो हिंदी भाषी या हिंदी की पढ़ाई नहीं की है। इसका उपयोग अगर हम आप हिंदी ब्लागर भी करने लगे तब तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे बच्चे हिंदी का एक शब्द भी ठीक से नहीं लिख पाएंगे। जैसे अभी तक तो स्कूलों में अच्छे हैंड राईटिंग की बात की जाती है, लेकिन कंप्यूटर आने के बाद कौन बच्चा अच्छे हैंड राईटिंग के लिए अभ्यास करेगा?

इसका इस्तेमाल उतना ही करें जितना जरूरी हो, वरना हम हिंदी को जितना बनाएंगे नहीं उससे कहीं ज्यादा नाश कर देंगे।

अगर इसका कोई और जबरदस्त फायदा वाला नजरिया बता पाए तो मुझे खुशी होगी।

दुनिया की दस बड़ी समस्याएं, क्रमवार..

पीने का साफ पानी World Problem

 यह जितनी बड़ी समस्या है, वैसी दिखती नहीं है। वह भी तब जब पृथ्वी पर 70 फीसदी पानी ही है। एक अनुमान के मुताबिक 200 करोड़ लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिल पाता है। और जिसके कारण हर साल औसतन लाखों लोगों की मौत होती है। यह समस्या छुपी हुई बेरोजगारी की तरह दिखती नहीं है। हम आप में से कई लोगों को साफ पानी नहीं मिलता है। कम से हम भारतीय इसको लेकर जितना लापरवाह हो सकते हैं, उससे ज्यादा लापरवाह हैं। कहने वाले तो यही कहते हैं कि अगला विश्वयुद्ध हुआ तो पानी के लिए ही होगा।

ऊर्जा स्रोतों की कमी
विश्वयुद्ध का तो पता नहीं लेकिन युद्ध तो इसके लिए शुरू हो भी चुके हैं। इराक पर अमेरिका का हमला, इसका मजमून है। अमेरिका अपने तेल के कुएं को बचा कर रख रहा है और हम भारतीय तेल को जलाने में लगे हुए हैं। कम ही परवाह है इसकी। हम सभी के घरों में जलने वाला बल्ब और रसोई में गैस इसके उदाहरण है। हमें ऊर्जा को बचाना चाहिए। कच्चा तेल कब 200 डालर प्रति बैरल हो जाएगा पता नहीं चलेगा। ठीक वैसे ही जैसे अभी कच्चा तेल दो साल में 70 डालर से 130 डालर तक पहुंच गया है। संभल जाइए..

जनसंख्या विस्फोट
यह विषय तो स्कूल में निबंध के रूप में आता था। अब कम ही सुनने को मिलता है। आदत हो गई है। 100 करोड़ जो पार कर गए। जोक्स बनने लगे थे, भारत किसी में तो नंबर-1 बन जाए। चीन ने अपने शिशु मृत्यु दर के साथ शिशु जन्म दर को भी रोका। हम भारतीय शिशु मृत्यु दर को तो रोक पाए लेकिन जन्म दर..। यह विस्फोट जैसा नहीं होगा। यह घर-घर की लड़ाई जैसा होगा। जहां भी जनसंख्या ज्यादा होगी, दिक्कतें वहीं होगीं। घर में हुई तो वहां प्रोब्लम, मोहल्ले में हुई तो वहां प्रोब्लम..जिला, राज्य से देश और विश्व तक..।

दिक्कतें और भी हैं..अगले पोस्ट में…

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