आतंकवाद का कोई पैटर्न नही होता. वो कही भी हो सकता है. वहा जहा ज्यादा से ज्यादा लोग हताहत हो. इनका काम होता है लोगो में खौफ पैदा करना. एक साथ पूरे राज्य पूरे देश में. इनका कुछ होता है या नही होता है नही मालूम लेकिन कोई धर्म कोई मजहब तो एकदम नही होता है. यह बच्चों, बुजुर्गो, मुसलमानो, हिन्दुओ सबसे घृणा करते हैं. भारत में यह हिन्दुओ को पाकिस्तान में मुसलमानों को, अमेरिका में ईसाईयो इनको नफरत है. यही है इनका पैटर्न.
यह लिस्ट आप लोगो को बताने के लिए काफी होगा की आतंकवाद की ना ही जात है ना ही कोई मजहब. कभी कही धमाका तो कही किसी प्लेन का अगवा. ये Destrctive Mind के होते हैं. बस यही है इनका पैटर्न.







आतंकवाद का मकसद है समाज को बाँट कर अपना मतलब हल करना, समाज की एकजुटता ही इस का जवाब है।
हिन्दुओ पर निशाना साध कर जयपुर में धमाका किया गया और हर धमाकों कि तरह यह धमाका सरकार नही पता लगागेगा कौन किया है धमाका।
आखिर वोट कि राजनिती में आम जनता कब तक मरती रहेगी। प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह को आखिर हिन्दुस्तान में हुये बम धमाकों पर निंद कैसे आ जाती है। आखिर मुस्लिम तुस्टीकरण में निरीह जनता को कब तक बलि का बकरा सरकार बनालि रहेगी। मुस्लिम तुस्टिकरण का ही नतिजा है कि पोटा जैसा कानुन हटा दिया गया सरकार अफजल को सरकारी दमाद बना कर बिढाये रखा है।
सेकुलर तालिबानियों को ये भी कहने में शर्म नही आयेगी कि बम धमाका हिन्दु मुस्लमान नही देखता है लेकिन क्या ये सच नही है कि हिन्दु बहुल इलाका में RDX बम फटता है और मुसलमानों के मस्जिद में देशी सुतली बम फटता है।
@हिंदू चेतना
आप अपने नाम पर रहे टू मैं भी आपका साथ दे सकता हू लेकिन आप अपने नाम के अनुरूप नही होकर मुसलमान विरोधी की तरह बात करते हैं. आप विश्वास मानिये आप अगर हिंदू परिवार में पैदा हुए है तो यह आपकी मर्जी से नही हुआ. सोचिये की गर आप मुसलमान परिवार में पैदा हुए होते तो.
और यह सुतली बम से भी लोग मरते हैं क्या…. मालेगाव में ३५ लोग और अजमेर में २ लोग मारे गए. क्या इनकी मौत सुतली बम से हुई है???