लोकतंत्र पर नही डंडे पर भरोसा

पता नही हम अच्छा क्यों नही देख पाते. कुछ भी बुरा हुआ उसके पीछे लग जाते हैं. हर जगह कुछ ना कुछ अच्छा होता है लेकिन टीवी हो या अखबार बताई जाती हैं बुरी खबर जायदा. (अच्छी भी बताई जाती हैं, लेकिन कम) इसमे भी हिंदू उग्र संगठन टू बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.  NDTV  का नया चैनल आ रहा है २१ जनवरी से रामायण दिखाया जाएगा. ये उन हिंदू संगठनो को नही दिखा. क्या दिखा? दिखा ये की भारत रत्ना के पोल में ऍम अफ हुसैन का नाम क्यों हैं? भाई ये एक निजी चैनल है वो क्या दिखायेंगे वो आप नही उनके समाचार सम्प्दक का निर्णय होगा. हिसार में ईश्वर सिंह को भारत रत्ना देने की मांग की गई है. आप जानते हैं कौन हैं ईश्वर सिंह? 10 में से 1 को पता होगा. मैं बता देता हू, ईश्वर सिंह हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हुआ करते थे. किसी भी बात में बात हम हिंदू संगठन इतने उग्र क्यों हो जाते हैं. राम की तो बात करते हैं लेकिन सौम्यता तो छु भी नही पाई है हमलोगों को. क्या सिखायेंगे और सिखने की तो छोड़ ही दीजिये.

राम का नाम यानि उम्र 40 से ऊपर

यह भी मजेदार है। आपका नाम भी आपके बारे में सबकुछ नहीं तो बहुत कुछ बता जाता है। अगर ना मिले तो अपवाद माना जा सकता है।

नाम के आगे राम लगा है तो उम्र तो 40 पार होगी ही। नाम में नाथ लगा है तो 50 पार। कुछ नाम तो ऐसे हैं कि अगर हजार लोगों की भीड़ है और आप पत्थर फेंक दें तो पत्थर उसी नाम वालों में से किसी एक का सर फोड़ देगी। रवि, सुनील, दीपक, सुमन, मीना, सीमा.. ऐसे ही कुछ नाम हैं। इसकी संख्या आप भी बढ़ा सकते हैं।

क्या कहा.. प्रत्युश। मुमकिन है लड़का दस साल से छोटा होगा। अपाला नाम की लड़की भी दस साल से छोटी होगी। नाम से उम्र का पता तो चलता ही है, आपका सामाजिक परिवेश, माता-पिता की शैक्षणिक योग्यता का भी अनुमान लगाया जा सकता है।

मेरा एक दोस्त मुझसे हमेशा लड़के और लड़कियों के नए नाम पूछता रहता है। मैं भी उसे गूगलिंग कर नाम झट बता देता हूं। दीपक, अजीत, विशाल जैसे नाम अब नहीं चलते। पता नहीं नाम रखते हुए लोगों को ऐसे नाम क्यों चाहिए होते हैं जिसका मतलब विरलों को ही पता हो। मेरा नाम राजेश रोशन है। अब राजेश नाम बच्चे के माता-पिता के साथ बुआ और मौसी को हलक से नहीं उतरता। राजेश!!! यह भी कोई नाम है राजेशश्श्श्श्। हुंह। ऐसी कुछ प्रतिक्रिया मिलती है।

राज के नाम पर सभी खुश हो जाते हैं। राज, क्या नाम है। राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। लेकिन उनके नाम को कोई ग्रहण नहीं करना चाहता। कृष्ण। नहीं चलेगा। हां!! कृष्ण के ही कुछ ऐसे नाम बताओ जो लोगों को ना पता हो, जिसे बोलने में जीभ को थोड़ी मेहनत करनी पड़ती हो।

तो अगर किसी टीवी न्यूज चैनल के एंकर की तरह कहूं तो कहा जा सकता है कि..

जाहिर तौर पर नाम बस नाम नहीं है। इसके भी कई मायने होते हैं। नाम का अपना मिजाज होता है। फिलहाल तो हम आपको यही कह सकते हैं कि राम का नाम बुलंद है लेकिन इसे ग्रहण कब कौन करेगा, देखने वाली बात है।

आई कैन ब्रेक इंग्लिश

हम स्कूल में थे। टीचर (मास्टर जी) कहा करते थे कि यू कैन ओल्सो स्पीक इंग्लिश। जस्ट डोंट शाई एंड ट्राई टू स्पीक। ब्रेक द आल रूल आफ ग्रामर। यह सच होते हुए नजर आया आज सुबह। किसी ने अपने घर के सामने एक तख्ती पर लिख रखा था, रेंट्स फार रूम (Rent for Rooms)। लगता है इन्हें भी किसी टीचर ने कुछ कहा होगा।

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