हम सुरक्षित हैं बाकियों को गोली मारो
Dream comes true…U’ll get everything…
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22 Nov, 2007 3 Comments
14 Nov, 2007 2 Comments
तैयार हो जाइये। शादी का मौसम जो आ गया है। वही शादी जिसके बारे में मुझ कुंवारे को कई बार यह सुनना पड़ा कि यह लड्डू है, जिसे खाओगे तो पछताओगे, नहीं खाओगे तो पछताओगे। खाके पछताना ज्यादा बेहतर है (आप सभी ने भी सुना होगा)।
आफिस में शादी के कार्ड आने शुरू हो गए हैं। कार्ड को जब लोगों को मिलता है तो लोग पूरी कार्ड पढ़ जाते हैं। सो मैंने भी परंपरा का निर्वहन किया। संस्कृत से शुरू होने वाला ओम गणोशाय नम: अब Om Ganeshay Namah के रूप में आ रहा है। सब कुछ इंग्लिश में केवल जय माता दी हिंदी में लिखा है।(अंग्रेजीमय अंग्रेजीमय हो गया)।
एक पल को तो लगा किसी के शादी का कार्ड नहीं क्रिसमस कार्ड है। इसका आभास हल्दी के छोटे से छौंक ने कराया।
वैसे कार्ड के डिजाइन दूल्हा और दूल्हन के पसंद से ही होता है। लेकिन उसपर भी लोगों के स्पेशल कमेंट्स जरूर मिलते हैं (जैसे हमलोगों को पोस्ट करने के बाद कमेंट्स मिलते हैं)।
यार कार्ड बड़ा अच्छा है, है ना।
थोड़ा भारी है।
कितना हल्का है, पेपर हाई क्वालिटी का है।
यार! यह हल्दी क्यों लगाते हैं?
तमाम सारे कमेंट्स।
शादी का कार्ड देने वाला बंदा तो बस शर्माता ही रहता है। कभी लाल तो कभी गुलाबी गाल..। मजेदार होते हैं सभी अनुभव। सब कुछ गुलाबी गुलाबी सा..।
हम सभी कुंवारों को भी इसका एहसास होगा। इंतजार कीजिए.. फिलहाल तो नाचने को तैयार हो जाइये
आज मेरे यार की शादी है…।
3 Nov, 2007 1 Comment
..गलत बात है। यह बात मुझे कल समझ में आई। अपने सारे बैंक डिटेल मैं नेटबैंकिंग से देख सकता हूं लेकिन फिर भी..। एटीएम से जब भी पैसे निकालने जाता हूं पैसे के साथ उसका डिटेल स्लीप के लिए यस बटन पर भी क्लिक करता हूं। क्यों? इन आदतों से हमें आपको निकलना होगा। कागज के खर्च को कम करना होगा। पर्यावरण बचाना होगा।
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