गुजरात विकास कर रहा है। विदेशी निवेश के मामले में राज्य सबसे अव्वल है। खूब पैसे आ रहे हैं राज्य में। मेरा अपना मानना हुआ करता था कि गुजराती लोग बड़े अच्छे होते हैं। मीठी जबान, मीठा खान-पान।
लेकिन यह क्या.. भारतीय युवा टीम ने ट्वेंटी20 का पहला विश्व प्रतियोगिता जीता। पूरा का पूरा देश खुशी से झूम रहा है। सभी राज्य अपने खिलाड़ियों को सम्मान और पुरस्कार दे रहें हैं। लेकिन गुजरात के नेतागण कुछ और ही कह रहे हैं।
फाइनल में इरफान पठान की भूमिका के बारे में हम सभी जानते हैं। लेकिन जब पत्रकारों ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रवक्ता से इस बारे में पूछा तो जवाब कुछ यूं था -..यह जीत और जीतों की तरह ही थी। इसमें कुछ नया नहीं था। गुजरात की तरफ से पठान भाइयों को ना कोई सम्मान मिला और ना ही पुरस्कार।
क्या ऐसे होते हैं गुजराती..। यह मोदी के घटिया सोच की परिचायक है। मैं तो यही कह सकता हूं कि बड़ी घटिया सोच रखते हैं नरेंद्र मोदी।
News clipping courtsey: The Indian Express 26 Sep 07








किसी नेता के लिए आपके जो भी विचार हो, मगर गुजरात तथा गुजरातीयों के लिए ऐसे विचार चौंका देने वाले है, वह भी अखबारी कतरन के आधार पर.
मैंच वाले दिन शाम को कर्फ्यू जैसा माहौल था और लोग टीवी स्क्रीनो पर चिपके हुए थे. कई सोसायटीयों में सब ने मिलकर खास आयोजन भी किये, और विजय के बाद सड़को पर जन सैलाब उमड़ पड़ा. सारी रात दिवाली थी. हमे पूरी टीम पर गर्व है. पठान बन्धूओ का योगदान हमारे लिए खुशी की बात है. क्षेत्रियता वादी रवैया हमें पसन्द नहीं.
क्षेत्रावाद तो मुझे भी नही पसंद. और आप जिसे अखबारी कतरन कह रहे हैं वो अखबार इंडियन एक्सप्रेस है. जो किसी भी तरह की खबरों को सच्चाई से दिखाने में विश्वास रखता है
हा यह जरूर है की नेता के कहे बायाँ से पूरे समाज की पहचान नही होती. लेकिन मोदी और उनके सिपहसालार का यह बयां तो उनकी घटिया सोच को ही दिखाती है
ताज़ा ख़बर यह है कि मोदी ने पैसे दे दिए हैं. अब पेपर-टीवी वालों को रोना बंद कर देना चाहिए और हां.. ईएसपीएन वालो के फुटेज काट काटकर बिना इजाज़त के जो खबरिया चैनल मैच दिखा रहे थे.. उसका बकाया अब तक नहीं पटाया है. दे दो अब ईएसपीएन को पैसा मीडिया वालों..या वो भी मोदी ही दे?
वाह भाई ! किसी की महानता (घटियापन) नापने का कितना बढ़िया पैमाना इजाद किया है आपने!
कल से ये भी कहना शुरू कर देंगे कि जो क्रिकेट नही देखता वह काफिर है, पुरातनपंथी है, प्रतिक्रियावादी है, या फिरकापरस्त है।
क्या भारतीय क्रिकेट टीम को जितना धन, इज्जत और अभिनन्दन मिला है, उसकी वह सचमुच अधिकारी है? चौबीस वर्ष बाद रोते-रोते जीत गये, बहुत बड़ा तीर मार लिया और इस पर मोदी हैं जो फूल के कुप्पा नहीं हुए!
क्या आप अपने बच्चे को दसवी में १स्त् आने पर पर भी ऐसा ही कुछ कहेंगे? बच्चा जब फेल हुआ हमने गालिया दी, मारा, पीटा, ख़ुद भी रोये तो फ़िर १स्त् आने पर क्या हम उसे शाबासी नही दे, उसे नही पुरस्कार दे?
अगर आप नही देना चाहे तो मत दे मैं अपने बच्चो को जरुर देना चाहूँगा.
क्या आपने यह लेख लिखने में जल्दबाजी नहीं कर दी??
थोड़ा इंतजार कर लेते तो थोड़ा ठीक रहता शायद।
नही नाहर जी एक दम नही मैंने जल्दी नही, मुझे लगता है की मैंने ख़बर लिखने में एक दिन लेट कर दिया और मेरी ही तरह गुजरात सरकार ने भी इनाम देने में एक दिन लेट कर दिया
मोदी ने गुजरात सरकार की ओर से पठान बंधुओं को पुरस्कार की घोषणा नहीं कि तो ये सबको बुरा लग रहा है, नागवार गुज़र रहा है, वैसे पठान बंधुओं को गुजरात से पुरस्कार न भी मिले तो भी वो करोड़ों के आसामी हो गए है।
और वो हॉकी टीम जो अभी महीना भर पहले एशिया कप जीत कर लाई उसे जबानी जमाखर्च में ही निपटा दिया, किसी ने उस पर एक नया पैसा खर्च नहीं किया। ये किसी अखबार, चैनल को नहीं दिखा, और न ही किसी और जगह चर्चा का विषय बना।
कमाल है !
मोदी जी क्यों इनाम की घोषणा करें? क्या खिलाडियों को खेलने के पैसे नहीं मिलते? और पठान बंधु क्यों नरेन्द्र मोदी के शाबासी के मोहताज हैं? उनका काम ही है खेलना, जो उन्होंने किया. ऎसी जीत से सभी खुश हैं. फिर इस तरह की बातें बीच में लाकर माहौल क्यों ख़राब करना?
आज टीम जीती है तो सभी इनाम की घोषणा से लेकर फोटो खिचाने तक पहुँच रहे हैं. धोनी को ‘झारखंड रत्न’ देने की जरूरत क्यों पड़ गई? खिलाडियों का काम था खेलना, उन्होंने किया. ये खिलाड़ी क्या इस लिए खेल रहे थे कि उन्हें राज्य सरकारों से ईनाम मिलाने वाला था?
और, साहब, ये कहना कि इंडियन एक्सप्रेस जो लिखेगा, वही सच है, बिल्कुल बकवास बात है.
शाबास पल्लव जी और शिवजी,
दर असल आजकल एक ट्रेंड बन गया है कि मौका देखो किस तरह मोदी को गाली दी जा सकती है।
राजेशजी अब आपके पास शिवजी के प्रश्नों का तर्कपूर्ण उत्तर है? लेख की तरह जल्दबाजी में नहीं सोच कर जवाब दें।
देश का राष्ट्रीय खेल हॉकी है औएर हॉकी में भी बरसों बाद टीम ने कमाल किया है, उन बेचारों का कोई स्वागत नहीं कोई ईनाम नहीं।
मान लेते हैं कि पठान बंधूओं में इरफान ने तो मेहनत की, यूसूफ ने क्या किया? फिर भी कम से कम दो करोड़ तो दोनों भाईयों को मिल ही गये हैं।
पल्लव जी, मिश्रा जी और नहर जी आप मेरी बातो को राजनितिक रुप में ले रहे हैं। इन खिलाडियों को सम्मान और पुरस्कार दे देने से ना तो वो आमिर बन जायेंगे और ना ही कोई गरीब । हमे उनका सम्मान करना चाहिऐ जैसे अच्छा लिखने के बाद हम और आप कमेंट कि अपेक्षा रखते है और हमारा हौसला बढ़ता है वैसे ही उनका भी हौसला और आत्मविश्वास बढ़ता है। किसी के कमेंट देने ना देने से हमारा लेक अच्छा या बुरा नही होता उसी तरीके से उनका खेल भी हमारे पुरस्कार और सम्मान का मोहताज नही है । अच्छी चीजो को अच्छा कहना और बुरी चीजो को बुरा कहना अच्छी परम्परा है । अब आप इसे माने या नही लेकिन मैं मानता हू और मानता रहूंगा
रही बात हॉकी खिलाडियो की तो इसकी भी चर्चा हो रही है मीडिया में भी और ब्लॉग में भी. मेरा कमेंट भी है जो कुछ २ घंटे पहले दिया गया है
राजेशजी
शायद मैं अपनी बात आपको सही नहीं समझा पाया बाकी राजनीती रूप में मैने नहीं लिया ना ही उस हिसाब से टिप्प्णी दी, राजनीतीक रूप तो आपके शीर्षक से स्पष्ट प्रतीत हो रहा है।
ज्यादा अच्छा हो आप नीरज दीवानजी का यह लेख पढ़ लेवें। http://neerajdiwan.wordpress.com/2007/09/26/neglectedsports/
अगर आपके मन को ठेस लगी हो तो टिप्पणी करने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।
पहली बात तो ये कि एक आदमी के बयान के आधार पर आप पूरे गुजरात के बारे में टिप्पणी कैसे कर सकते हैं?
दूसरी बात हो सकता है कि अगला बंदा मेरी तरह क्रिकेट में रुचि न रखता हो इसलिए उसकी प्रतिक्रिया ठंडी हो।
राजेश भाई, आपकी बातों को बिल्कुल भी राजनितिक रूप में नहीं देखा है। ना ही मोदी को गाली देने के लिए या उनके पक्ष में खड़ा हूँ। उनकी राजनीति वो जाने।
आपका कहना कि खिलाड़ी जीत कर आए हैं तो उनका हौसला बढ़ाना चाहिए इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। सौ टके सहमत हूँ आपकी बात से। आज तो टीम वापिस आयी है, हो सकता है कि गुजरात सरकार भी हौसला अफजाई के लिए कुछ करे। बेहतर हैं कि पठान बंधुओं के मामले में इंतज़ार करें।
लेकिन फिर भी हॉकी की टीम वापिस आए तो महीना हो गया। क्या हॉकी के खिलाडि़यों को हौसला अफजाई की जरुरत नहीं पड़ती, या उनका जीतकर आना अच्छा नहीं था कि उसे अच्छा न कहा जाए। और हॉकी ही क्या और कोई भी खेल ले लिजिए। शतरंज, फुटबॉल, कबड्डी, कोई भी नाम लें और हम पूछे खुद से कि क्या हमको किसी और खेल के चार खिलाडि़यों के नाम भी याद हैं? शतरंज में जब आनंद ने विश्व विजेता बने तब क्या उनके सम्मान में इतना कुछ हुआ था।
आपके बिल्कुल सच कहा कि कोई खेल किसी के पुरस्कार या सम्मान का मोहताज नहीं होता। तो फिर इस चर्चा की जरुरत ही नहीं।
लेकिन सच्चाई यह है कि पुरस्कार दिए जा रहे हैं और भरपूर दिए जा रहे हैं ऐसे में क्या देश के सारे खिलाडि़यों को समान दृष्टि से देखना उचित नहीं ? क्या हॉकी कि खिलाड़ी या फुटबॉल की टीम देश के लिए नहीं खेलती ?
रही बात हॉकी पर चर्चा की तो जो लिंक आपने दिए हैं वो आज के उस समाचार के ही हैं जिसमें हमारे राष्ट्रीय खेल की राष्ट्रीय टीम के सदस्यों ने सौतेलेपन का इलज़ाम लगाकर भूख हड़ताल की बात कही है। कोई भी चर्चा इस धमकी से पहले की नहीं ।
राजेशजी बड़ी अच्छी सहनशक्ति है आपकी.. ये जिन साथियो से आप बात कर रहे है बार बार जवाब दे रहे हैं ऐसे लोगों को आप समझाना क्या चाहते है.. इनका ना क्रिकेट से लेना देना है ना हॉकी से ये सिर्फ़ मोदीजी के भक्त हैं और भक्त को आप दिगभ्रमित नही कर सकते इन्होने अपनी टिप्पणी से ज़ाहिर कर दिया.. तो बार बार कम से कम इन्हें समझाने ज़रूरत मुझे समझ नही आती
@ विमल वर्मा जी,
सरकार, किसी के बारे में बिना जाने, आप कैसे कह सकते हैं कि उसे क्रिकेट या हॉकी की जानकारी नहीं है? आप कैसे लिख सकते हैं कि हम सभी मोदी भक्त हैं? भक्त तो भगवान् के होते हैं, और मोदी जी कोई भगवान् नहीं हैं. इस मुद्दे पर किसी ने अगर राजनीति शुरू की, तो वे टीवी चैनल वाले ये अखबार वाले हैं. राजेश जी की पोस्ट उसी राजनैतिक दृष्टि का हिस्सा है.
क्रिकेट खिलाडियों की प्रशंशा होनी ही चाहिए, और हो भी रही है. लेकिन किसी राजनेता द्वारा प्रशंशा कितनी जरूरी है, मुझे ज़रा समझायें. पूरा देश ही इन खिलाडियों को शाबाशी दे रहा है. फिर मोदी जी ने शाबाशी नहीं भी दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पडा? अगर खिलाडियों के लिए शाबाशी देने को आप क्रिकेट की समझ का उदाहरण मानते हैं, तो ये मान लिया जाए कि हमारे नेताओं को क्रिकेट की सब से ज्यादा समझ है. पुरस्कारों के अपेक्षा में तो नहीं खेलते ये खिलाड़ी. खेलते हैं क्या?
या हम ये मान लें कि इन खिलाडियों को खेलने के पैसे अलग से चाहिए और जीतने के अलग से.
आप सब लोगो की भावनावो का मैं सम्मान करता हू. हर एक को हक है की वह जैसा सोचे उसे बया करे लेकिन मेरे दोस्तो अच्छी सोच रखे मैं तो यही कह सकता हू . विरोध से ना डरे. अगर आप समझते हैं की आप जो कह रहे हैं वो सही है तो फ़िर उस पर अडिग रहे लेकिन केवल किसी बात पर इसलिए अडिग नही होना चाहिए की क्योंकि आप की अहम आप से वो कहने को कह रहा है . यह बड़ी बुरी चीज है. अच्छे इंसान को भी बुरा बाना देती है. वैसे मोदी ने भी पठान बंध्वो को ५-५ लाख देने की घोषणा कर दी है. आप सभी लोगो का धन्यवाद.
[…] की बारिश क्यों तो दूसरी ओर कोई कुछ गरीब क्रिकेटरों के हक़ के लिए लड़ रहा है। इधर जीतू भाई अपने बचपन के बीते […]
विमल जी की टिप्प्णी खिसियानी बिल्ली…. कहावत को चरितार्थ करती है। तर्कपूर्ण जवाब देने का माद्दा नहीं था , इसलिये चिरपरिचित जवाब दे दिया के जो लोग यहाँ राजेशजी की बात का विरोध कर रहे हैं वे मोदी के भक्त हैं। … वाह बंधू। खुद ही फैसला कर दिया महज दो टिप्प्णियों में??
[…] भी कभी नहीं मिले. मीडिया के लोग जैसे कि राजेश ने मौका नहीं चूका और गुजरात के मुख्य […]