यह प्रकृति है। गुस्सा कोई भी हो सकता है। इस पर किसी का जोर नहीं है। डा अस्थाना का भी नहीं(मुन्ना भाई एमबीबीएस वाले)। कई तो इसी के लिए जाने जाते हैं। स्पेन के सांड, भारत के नेता गण। भारतीय पत्रकारों में तो यह खूब पाया जाता है। हमेशा अपने सवालों से दूसरों को नीचा दिखाना चाहते हैं।

वैज्ञानिक इस पर शोध करने लगते हैं। सर्वे करने वाले प्रश्नों की पूरी लिस्ट तैयार कर देते हैं। मजमून देखिए-

आप कौन-कौन सी बातों पर गुस्सा करते हैं?
क्या आप गुस्सा केवल अपने से छोटों पर करते हैं?
क्या आपको अपने बारे में सच्ची और कड़वी बात सुनने पर गुस्सा आ जाता है?

वगैरह-वगैरह..

यह चेतन प्राणी होने का एक सबूत है। इसका सबूत माइक टायसन ने इवांडर होलीफील्ड का कान काटकर दिया था। और सिद्धू ने बैंक के कर्मचारी को लात-घूंसे मारकर। आपलोगों ने भी सबूत कहीं ना कहीं, किसी ना किसी को तो दिया ही होगा।

Angry man

मैंने आज किसी को इसका सबूत दिया है। अपने एक अजीज दोस्त को। उसने ऐसा तो कुछ नहीं किया था लेकिन मेरे से गलती हो गई। जिसका दुख मुझे अब हो रहा है। वह तो इसे नहीं पढ़ पाएगा लेकिन आप लोग ही मुझे माफ कर देना।