Jaideep Sahni

जी हां यही हैं चक दे! इंडिया के असल हीरो। साहनी ने जो काम किया है, वह कमाल का है। आप सभी लोगों ने अब तक तो फिल्म देख ही ली होगी। और नहीं देखी होगी तो सुना जरूर होगा। जिन्होंने चक दे.. देखी है इनका काम भी देख होगा। इन्हें नहीं देख पाए! जयदीप शाहनी और कोई नहीं चक दे.. के स्क्रिप्ट राइटर है। अब तो आप मानते होंगे कि चक दे.. के असल हीरो यही हैं।

वैसे तो इनके पिता आईएएस आफिसर थे और मां स्कूल टीचर लेकिन परिवार काफी साधारण था। साधारण परिवार को समझने के लिए आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि ‘खोसला का घोसला’ फिल्म की पटकथा इनके परिवार के साथ हुई घटना पर आधारित है।

जयदीप साहनी ने अपनी पढ़ाई दिल्ली के केंद्रीय विद्यालय के बाद डीपीएस, आरकेपुरम से की। उसके बाद उन्होंने दिल्ली में NIIT में एक साल तक कंप्यूटर प्रोफेशनल के रूप में काम किया। और फिर 6 साल तक किसी एड एजेंसी के लिए। वहां से जब उन्होंने अपना स्वतंत्र काम करने का सोचा तो इस्तीफा पत्र में लिखा, तेरी दो टकिया की नौकरी में मेरा लाखों का सावन जाए..।

रामगोपाल वर्मा को जयदीप साहनी के बारे में किसी ने बताया और उसके बाद उन्होंने लिखा ‘जंगल’। जंगल से जो सिलसिला शुरू हुआ वह ‘कंपनी’, ‘बंटी और बबली’, ‘खोसला का घोसला’ और अब चक दे! इंडिया।

आत्मविश्वास से भरे जयदीप शाहनी एक साक्षात्कार में कहते हैं कि पटकथा लिखने के लिए आपके आस पास चीजों को महसूस करना पड़ता है।