सच्ची घटना पर आधारित। आप बीती सुना रहा हूं। कोई मजाक ना समझे। यह समझ लें कि जब आप बुढ़ा जाएं तो ऐसा कुछ भी ना करें। नहीं तो कोई आपके बारे में भी कोई कुछ कहेगा या लिख देगा।
मुझे थोड़ी जल्दी थी। दफ्तर से बिना पूछे अपने काम से निकला था। काम पूरा कर फिर दफ्तर भी लौटना था। मुझे जरूरत थी अपने आई कार्ड के फोटो कापी की। दुकान पर गया तो देखा एक बुजुर्ग रौकिंग चेयर पर आराम फरमा रहे थे। हाथ में पका हुआ भुट्टा। यूं कहिए कि बस मजे ले रहे थे। मैंने कहा कि फोटो कापी कराना है। उन्होंने पूछा क्या है? मैंने आई कार्ड दिखाया.. उन्होंने इशारा करते हुए बताया कि आगे दुकान है, वहां से करा लो, मैं नहीं कर पाऊंगा।
मुझे जल्दी तो थी ही, मैंने निवेदन किया। उत्तर में उन्होंने कहा कि आगे चले जाओ वहां हो जाएगा।
मैं आगे चला गया। वहां की फोटो कापी मशीन खराब थी। वापस लौटा। पुन: उसी दुकान पर। मैंने कहा कि मुझे इसकी जरूरत है। प्लीज कर दीजिए। उन्होंने कहा मैं एक-दो कापी नहीं करता हूं। आगे एक और मार्केट है, वहां चले जाओ हो जाएगा। मैंने कहा कि एक नहीं दस कर दीजिए लेकिन कर दीजिए।
बुजुर्ग ने कहा, जब जरूरत एक की है तो दस क्यों? मैंने कहा एक और दस ज्यादा मतलब है कि मुझे जरूरत और जल्दी दोनो है। उसने फिर मुझे कहा कि आगे वाली मार्केट में चला जाऊं। मैंने कहा आप दस के पैसे ले लीजिए।
अब बुजुर्ग कहता है कि एक मैं करता नहीं हूं। दस करूंगा तो कहोगे कि पैसे का भूखा है। मुझे पैसे कमाने का शौक नहीं है। आगे चले जाओ वहां से करा लो।
क्या बुजुर्ग(बुड्ढा) सठिया हुआ नहीं था?

