क्या है 123 समझौता और हाइड एक्ट?

सबसे पहले यह Hyde Act है ना कि Hide Act ।

यह दोनों मसले चर्चा-ए-आम है। हर कोई 123 समझौते के बारे में जानना चाहता है। अब वामदलों के विरोध के बाद लोगों में हाइड एक्ट को लेकर जागरूकता फैल रही है।

मैं पूरी कोशिश करूंगा कि इसे समझा पाऊं।

सबसे पहले चर्चा 123 समझौते की। भारत-अमेरिका के बीच जो एटमी समझौता हुआ है वह समझौता अमेरिका ने अपने एटमी कानून के अनुच्छेद 123 में संशोधन कर किया है। इस संशोधन के बाद अमेरिका किसी ऐसे देश से समझौता कर सकता है जिसने एनपीटी में हस्ताक्षर नहीं किया हो।

हाइड एक्ट का नाम इसके निर्माणकर्ता हेनरी जे हाइड के नाम के कारण पड़ा। इस समझौते का पूरा नाम अमेरिका-भारत शांतिपूर्ण एटमी ऊर्जा सहयोग एक्ट, 2006 है। हाइड एक्ट के तहत अमेरिका को भारत के साथ यह समझौता करने की छूट दी गई है, जिसने एनपीटी में हस्ताक्षर नहीं किया है। इसके तहत भारत अपने नागरिक हितों के लिए इसका सैन्य इस्तेमाल कर सकता है। अपने ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकता है।

हाइड एक्ट को कांग्रेस के हाऊस आफ रिपरशेंसटेटिव ने 68 के मुकाबले 359 मतों से और सीनेट ने 12 के मुकाबले 85 मतों से पारित कर दिया है।

अगर आप इस संबंध में और कुछ जानना चाहते हैं तो कृप्या इन लिंक्स को देखें। या फिर अपने कमेंट देकर पूछें..

व्हाइट हाऊस से जारी खबरें
हाइड एक्ट के बारे में कांग्रेस से जारी विज्ञप्ति (PDF File)
हिंदुस्तान टाइम्स पर संबंधित खबर
वीकिपीडिया पर समझौते का लेख
डेली पायनियर पर एक आलेख

भारत की कानून व्यवस्था बड़ी गहरी है!!!

Shibu Soren 

शिबू सोरेन रिहा हो गए और सलमान खान जेल भेजे गए। सलमान खान के जेले भेजे जाने पर किसी ने कहा कि भारत की कानून व्यवस्था बड़ी गहरी है। जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। मैं अपने राज्य के वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन के बारे में सोचने लगा..। सच में भारत की कानून व्यवस्था बड़ी गहरी है!!!

 Salman khan

दिल्ली ने बदल दिया

जो काम हम पांच छह दोस्त नहीं कर पाए, उसे दिल्ली की आबो हवा ने कर दिया। मेरा एक दोस्त क्लीन शेव हो गया। उसकी पोस्टिंग स्टेट बैंक आफ हैदराबाद, जनपथ ब्रांच में पिछले पांच महीने पहले हुई है।

हम रांची में साथ पढ़ते थे। उस समय उसकी मूंछें हुआ करती थी। कल जब मैं उससे मिला तो देखा उसने क्लीन शेव करवा लिया है।

लोगों के लिए बड़ी घटना नहीं होगी लेकिन मेरे लिए तो..। हम कुछ दोस्त जो पहले से ही क्लीन शेव हुआ करते थे, उसे कहा करते थे..। साफ कर ले, हटा दे। और वो नहीं के साथ परंपरा और संस्कृति की दुहाई देता था।

उसका चेहरा देख कर मुझे कुछ ऐसा ही लगा जैसे लोगों को शेरशाह सूरी के ग्रांड ट्रंक रोड बनाने के बाद लगा होगा। क्लीन रोड, क्लीन शेव।

मैं केवल अनुमान लगा पा रहा हूं। दिल्ली की आबो हवा ने उसे बदल दिया।

मैं डर जाता हूं!!

Driving car

लहराते बाल। आंखों में फैशनबल चश्मा। जींस और टी शर्ट। यहां तक तो मैं खुश रहता हूं लेकिन.. अगर इन्हीं हाथों स्टीयरिंग देखता हूं तो डर जाता हूं।

मेरे अपने निजी अनुभव के अनुसार महिलाएं अच्छी ड्राइवर नहीं होती हैं। सीधा रास्ता तब तक तो ठीक है लेकिन जहां थोड़ी भाड़ हुई नहीं कि आप इनसे दूर हीं रहें..।

मैंने कई मौकों पर देखा है कि महिलाओं का क्लच और गियर पर तालमेल काफी हद तक डरावना होता है। तो बात मानिए पुलिस के आगे और घोड़ों के पीछे के साथ-साथ, महिलाएं जब गाड़ी चलाएं तो इनके आगे-पीछे कहीं ना रहें।

यह कुछ ऐसा है जैसे कि पुरुष अच्छा खाना नहीं बना पाते ठीक वैसे ही औरतें अच्छी गाड़ी नहीं चला पाती।

(संजीव कपूर, मशहूर शेफ का नाम ना लें। अपवाद हर जगह होता है।)

बच गए हमलोग!!!

सूर्य का जीवन जीने के लिए होना बहुत जरूरी है। इसके बगैर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। एवरेस्ट में चढ़ना काफी मुश्किल है। आदमी एवेरस्ट पर चढ़ गया। वहां से टनों कचरा मिल रहा है। शायद प्रकृति ने इसलिए सूर्य को आदमी की पहुंच से दूर बनाया है।

चिट्ठा चोर या ‘भूखा’ चिट्ठेकार

देखने का नजरिया अलग है। किसी ने अगर आलोक पुराणिक जी के चिट्ठे से दो पोस्ट हू बहू कापी कर अपने चिट्ठे में डाल दिया तो क्या वह चोर हो गया? आप कहते होंगे, मैं उसे नहीं मानता। मैं उसे उसकी भूख मानता हूं।

आइडेंटिटी क्राइसिस की भूख। वह अच्छा लिखना नहीं जानता। क्रिएटिविटि नहीं है उसके पास। तो क्या करे! हम आप जो लिखते हैं उसका विचार हम अपने आस पास से लेते हैं। कोई कहीं के लिखे हुए एक लाईन से ही पूरी पोस्ट लिख देता है। कोई कुछ करता है तो कोई कुछ।

अभी कुछ दिन पहले मुझे एक चिट्ठेकार ने एक लिंक देकर यह बताया गया कि इस चिट्ठेकार ने कईयों की पोस्ट को अपने नाम से पब्लिश कर दी है। मैंने कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। मुफ्त में प्रचार हो रहा है। हां, वो अलग बात है कि आपका नाम नहीं दिया गया है। कोई बात नहीं। आपको पढ़ने वाले आपकी लेखनी को जानते हैं। नाहक आप परेशान ना होईए।

उन्होंने कहा कि यह तो गलत बात है कि बिना नाम दिए उसने यह सब काम कर दिया। मैंने कहा गलत तो है लेकिन आप कुछ कर नहीं सकते। और करना भी नहीं चाहिए। तब तक जब तक वह आपका प्रतियोगी ना बन जाए।

आपका लिखा हुआ पोस्ट अगर कोई दूसरा पब्लिश करता है तो वह बेचारा ‘भूखा’ है। आपने उसे खाना दिया है। ठीक है कि वह आपका नाम नहीं ले रहा है, लेकिन दिया आपने ही है। जिसे सब लोग जानते हैं।

इसलिए शोर मत मचाइए, भूखे को खाना देना पुण्य की बात है। खुश हो जाइए। इसमें आपका कोई नुकसान नहीं हो रहा है।

नोट: (आलोक पुराणिक जी का नाम मात्र उदाहरण के लिए दिया गया है)

भारतीयों में आइडेंटिटी क्राइसिस सबसे ज्यादा!!

Posters

एक बड़े नेता ने भाषण दिया तो अखबार में साथ में उपस्थित होने वालों का पूरा ब्यौरा पूरी रिपोर्ट से बड़ी होती है।

अपने परिचय को लेकर सबसे ज्यादा सांसत में हम भारतीय ही दिखते हैं। मैं फलां हूं। लोगों को यह अहसास कराना कि हम भी कुछ हैं। इस कारण ही कई गलत हो जाते हैं।

यह ख्याल मेरे जेहन में आज सुबह एक पोस्टर देखने के बाद हुई। दिल्ली के त्रिलोकपुरी से शंकर भाटी को बसपा के युवा अध्यक्ष बनाए गए(अंदाजा लगाइए कितनी बड़ी खबर है) पूरा का पूरा इलाका पोस्टरों से भरा है। साथ में बड़े-बड़े बोर्ड और होर्डिग। भाटी जी की तस्वीर सबसे बड़ी होती है और साथ ही छोटी-छोटी तस्वीर मायावती, सतीश मिश्रा और कांशी राम की।

क्या गजब देश है? और क्या गजब के लोग?

क्या आप अजातशत्रु बन पाएंगे?

लोग कहते हैं ना चाहने से क्या नहीं होता है! सब कुछ हो जाता है! क्या सच में सब कुछ हो सकता है? क्या आप जीते जिंदगी अजातशत्रु बन सकते हैं। अजातशत्रु। वो जिसका कोई शत्रु ना हो।

आत्मविश्वास और धैर्य उसकी दो सबसे बड़ी पूंजी है। वह घड़ी के समान है। जो हमेशा चलती रहती है। उसका गुण धीरे-धीरे निखर कर आता है। पांच या दस मिनट में वह किसी को प्रभावित नहीं करता है। और ना ही पांच या दस दिनों में। उसका असली गुण आपके सामने कुछ महीनों में आपको दिखता है।

मेरा एक दोस्त है। उम्र यही कोई 27-28 होगी। वह भी पत्रकार है। जितना मैं उसके बारे में जानता हूं, उसके मुताबिक वह जीते जिंदगी अजातशत्रु बना हुआ है। मेरे जैसे कई दोस्त हैं उसके। यूं कहिए लंबी फेहरिस्त है। लेकिन कोई उसका शत्रु नहीं है। कोई उसका बुरा नहीं चाहता। कोई उससे ईष्र्या नहीं करता। गजब है वो। उसके लिए मैं हमेशा एक बात लोगों को बोलता, बहुत ही सरल है वो।

सिंपली आउटस्टैंडिंग। बहुत आगे जाएगा मेरा यह दोस्त सिद्धार्थ।

स्वतंत्रता आज भी कुछ मांग रही है?

जय हिंद! स्वतंत्रता दिवस पर सभी भारतवासियों को ढेरों मुबारकबाद। यह स्वतंत्रता सबको मिले। हमें बहुत कुछ मिला है। लेकिन क्या यह बहुत कुछ सबों को मिला है?

ढाबे में काम करने वाले बच्चों को सामाजिक स्वतंत्रता। गरीबों और पिछड़ों को काम पाने की स्वतंत्रता। अगर यह नहीं है तो हमारा स्वतंत्र भारत के प्रति इतना भावुक होना बेमानी है। क्या आप इस स्वतंत्रता को पाने के लिए कुछ मदद कर सकते हैं? लोकतंत्र भारत चिल्ला रहा है। चीख-चीख कर चिल्ला रहा है। इसे सुनने के लिए कानों की नहीं आंखों की जरूरत है! क्या आप इसे सुन पा रहे है?

जागरण डॉट काम हुआ अब याहू जागरण डॉट काम

यह बताता है कि हिंदी का बाजार बढ़ रहा है। दैनिक जागरण ने बाजार को बताया कि हिंदी भी अपना बाजार कायम कर सकता है। पहले अखबार के जरिए। दैनिक जागरण विश्व का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अखबार है। और अब इंटरनेट के जरिए। हिंदी का पाठक जागरण डाट काम से वाकिफ है। अब यह दैनिक जागरण और याहू दोनों के संयुक्त प्रयास से चलेगा।

याहू का किसी हिंदी न्यूज पोर्टल के साथ गठजोड़ यह बताने के लिए काफी है कि हिंदी का बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा है। दैनिक जागरण का उदय 1997 में हुआ था। अपने निर्माण के दस साल बाद इसने जो मुकाम हासिल किया है, उसे छू पाना इसके प्रतियोगियों के लिए काफी मुश्किल है।

फिलहाल इसका बीटा वर्जन लांच किया गया है। साथ ही इसका पुराना वर्जन भी चल रहा है, जो धीरे-धीरे हट जाएगा। तो हम अब हम अपने जागरण को अब नए रूप में देख सकते हैं।

जागरण-याहू बीटा वर्जन